समंदर की ताकत की जंग: नेवी में नंबर-1 अमेरिका, जानें दूसरे स्थान पर कौन? और कहां खड़ा है भारत?
दुनिया की नौसैनिक ताकतों की रैंकिंग में अमेरिका अब भी पहले स्थान पर बना हुआ है। वहीं चीन तेजी से अपनी नौसैनिक क्षमता बढ़ाकर दूसरे स्थान पर पहुंच चुका है। रिपोर्ट के अनुसार भारत इस सूची में सातवें स्थान पर है, लेकिन हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी रणनीतिक ताकत काफी मजबूत मानी जाती है।
समंदर में ताकत की होड़ और बदलता वैश्विक समीकरण
दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच अब मुकाबला केवल जमीन और आसमान तक सीमित नहीं रहा। समुद्र में वर्चस्व की लड़ाई भी उतनी ही अहम हो गई है। आधुनिक युद्ध रणनीति में नौसेना की ताकत किसी भी देश की वैश्विक सैन्य क्षमता का बड़ा पैमाना मानी जाती है।
इसी संदर्भ में विश्व आधुनिक युद्धपोत निर्देशिका (डब्ल्यूडीएमएमडब्ल्यू) की रिपोर्ट दुनिया की प्रमुख नौसेनाओं की ताकत का आकलन करती है। इस रैंकिंग में जहाजों की संख्या, तकनीक, पनडुब्बियों की क्षमता और रणनीतिक ताकत जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेना आज भी अमेरिकी नौसेना मानी जाती है।
अमेरिकी नौसेना की बादशाहत
अमेरिका की नौसैनिक ताकत का सबसे बड़ा आधार उसके विशाल विमानवाहक पोतों का बेड़ा है। अमेरिका के पास कुल 11 विशाल विमानवाहक पोत हैं, जिनमें से ज्यादातर परमाणु ऊर्जा से संचालित होते हैं।
परमाणु ऊर्जा से चलने वाले ये युद्धपोत महीनों तक बिना ईंधन भरे समुद्र में तैनात रह सकते हैं। यही वजह है कि अमेरिका दुनिया के किसी भी हिस्से में अपने सैन्य अभियान को तेजी से अंजाम देने में सक्षम है। इसके अलावा अमेरिकी नौसेना के पास आधुनिक रसद सहायता तंत्र, उन्नत मिसाइल प्रणाली और दुनिया भर में फैले सैन्य ठिकानों का मजबूत नेटवर्क भी मौजूद है।
दूसरे स्थान पर चीन की मजबूत दावेदारी
रिपोर्ट के अनुसार इस सूची में दूसरे स्थान पर चीनी जन मुक्ति सेना की नौसेना है। पिछले कुछ वर्षों में चीन ने अपनी नौसेना के आधुनिकीकरण पर भारी निवेश किया है। नए युद्धपोतों का निर्माण, विमानवाहक पोतों का विकास और पनडुब्बियों की संख्या बढ़ाना उसकी रणनीति का अहम हिस्सा है। दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी और नए जहाजों की तैनाती इस बात का संकेत है कि वह भविष्य में अमेरिका को चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।
रूस की ताकत उसकी पनडुब्बियों में
इस सूची में तीसरे स्थान पर रूसी नौसेना है। रूस की नौसेना को अक्सर एक जटिल लेकिन बेहद घातक ताकत माना जाता है। इसकी असली शक्ति उसकी परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम पनडुब्बियों में छिपी हुई है। समुद्र की गहराइयों में छिपकर हमला करने की क्षमता रूस को रणनीतिक बढ़त देती है। इसके अलावा रूस के पास उन्नत जहाज भेदी मिसाइलें भी हैं, जो उसे आक्रामक और रक्षात्मक दोनों मोर्चों पर खतरनाक बनाती हैं।
इंडोनेशिया और दक्षिण कोरिया की तेज छलांग
रैंकिंग में चौथे स्थान पर इंडोनेशिया की नौसेना ने जगह बनाई है। इंडोनेशिया के पास लगभग 245 युद्धपोत हैं और वह दूर समुद्री क्षेत्रों में अभियान चलाने की अपनी क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है।
वहीं पांचवें स्थान पर दक्षिण कोरिया की नौसेना है, जिसे एशिया की सबसे आधुनिक नौसेनाओं में गिना जाता है। दक्षिण कोरिया ने अत्याधुनिक जहाजों और रक्षा तकनीक पर बड़ा निवेश किया है, जिसकी वजह से उसने जापान और कई यूरोपीय देशों को भी पीछे छोड़ दिया है।
विश्व रैंकिंग में भारत की स्थिति
इस सूची में भारतीय नौसेना सातवें स्थान पर है। भारत के पास इस समय दो शक्तिशाली विमानवाहक पोत मौजूद हैं—
आईएनएस विक्रांत
आईएनएस विक्रमादित्य
इसके अलावा भारतीय नौसेना के बेड़े में करीब 19 पनडुब्बियां और 70 से अधिक युद्धपोत शामिल हैं। हालांकि भारत शीर्ष पांच देशों में शामिल नहीं है, लेकिन हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी रणनीतिक स्थिति और उभयचर हमला क्षमता उसे एक बेहद प्रभावशाली ताकत बनाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की तेजी से बढ़ती नौसैनिक ताकत को देखते हुए भारत को अपने नौसैनिक आधुनिकीकरण की रफ्तार और तेज करनी होगी।

