रमजान की सबसे रहस्यमयी और मुकद्दस रात: आखिर शब-ए-कद्र कब आती है और क्यों कहा जाता है इसे ‘नाइट ऑफ पावर’?

शब-ए-कद्र रमजान की सबसे मुकद्दस रात मानी जाती है। इसी रात कुरआन को लौह-ए-महफूज़ से पहले आसमान तक उतारा गया और बाद में 23 सालों में पैगंबर मुहम्मद ﷺ पर नाज़िल हुआ। कुरआन के अनुसार यह रात हज़ार महीनों से बेहतर मानी जाती है।

रमजान की सबसे रहस्यमयी और मुकद्दस रात: आखिर शब-ए-कद्र कब आती है और क्यों कहा जाता है इसे ‘नाइट ऑफ पावर’?

अमीर हमज़ह

रमजान का महीना जैसे-जैसे अपने आख़िरी पड़ाव की ओर बढ़ता है, दुनिया भर की मस्जिदों में इबादत का माहौल और गहरा हो जाता है। मुसलमान रात-रात भर नमाज़ पढ़ते हैं, कुरआन की तिलावत करते हैं और एक ऐसी खास रात की तलाश करते हैं जिसे इस्लाम में सबसे ज्यादा मुकद्दस माना जाता है। इस रात को शब-ए-कद्र (Laylat al-Qadr) कहा जाता है, जिसे अंग्रेज़ी में “Night of Power” या “Night of Decree” भी कहा जाता है।

इस्लामी मान्यता के अनुसार यही वह रात है जिसका जिक्र कुरआन की सूरह अल-कद्र में किया गया है। इस सूरह में बताया गया है कि यह रात हज़ार महीनों से बेहतर है, यानी इस रात की गई इबादत का सवाब सामान्य समय से कई गुना अधिक माना जाता है। इसी वजह से दुनिया भर के मुसलमान इस रात को बेहद खास मानते हैं और पूरी रात इबादत में बिताते हैं।

इस रात की अहमियत इसलिए भी बहुत ज्यादा मानी जाती है क्योंकि इसी रात कुरआन का अवतरण शुरू होने से जुड़ी घटना मानी जाती है। कई इस्लामी विद्वानों के अनुसार शब-ए-कद्र की रात कुरआन को “लौह-ए-महफूज़” से पहले आसमान (बैत-उल-इज़्ज़ह) तक उतारा गया था। इसके बाद फ़रिश्ता जिब्रील (अ.स.) के ज़रिये यह लगभग 23 वर्षों में धीरे-धीरे पैगंबर मुहम्मद ﷺ पर नाज़िल हुआ।

हालाँकि शब-ए-कद्र की सटीक तारीख़ इस्लाम में निश्चित नहीं बताई गई है। हदीसों के अनुसार पैगंबर मुहम्मद ﷺ ने मुसलमानों को सलाह दी कि इसे रमजान के आख़िरी दस दिनों की विषम (Odd) रातों में तलाश करें। इसलिए मुसलमान इन दिनों में इबादत को और बढ़ा देते हैं।

इनमें आम तौर पर 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं रात को खास माना जाता है। कई इस्लामी विद्वान 27वीं रात को शब-ए-कद्र होने की संभावना सबसे ज्यादा मानते हैं, लेकिन इसे निश्चित रूप से तय नहीं किया गया ताकि लोग पूरे आख़िरी दस दिनों में इबादत करें।

“कद्र” अरबी शब्द है, जिसका मतलब क़दर, ताकत या तक़दीर का फैसला होता है। इसी वजह से अंग्रेज़ी में इसे “Night of Power” या “Night of Decree” कहा जाता है। इस्लामी मान्यता के अनुसार इस रात अल्लाह के हुक्म से फरिश्ते धरती पर उतरते हैं और पूरी रात रहमत और बरकत का माहौल रहता है।

शब-ए-कद्र के मौके पर दुनिया भर के मुसलमान मस्जिदों और घरों में रात भर इबादत करते हैं। लोग नफ़्ल नमाज़ पढ़ते हैं, कुरआन की तिलावत करते हैं, अल्लाह से दुआ और माफी मांगते हैं और जरूरतमंदों को ज़कात व सदक़ा देते हैं।

इसी वजह से रमजान के आख़िरी दस दिन मुसलमानों के लिए बेहद खास माने जाते हैं, क्योंकि इन्हीं दिनों में वह मुकद्दस रात आती है जिसे पूरी इस्लामी दुनिया में बरकत, रहमत और माफी की सबसे बड़ी रात माना जाता है।