2001 के बाद सबसे सूखी फरवरी, मार्च–मई में बढ़ेगी गर्मी और लू का खतरा: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग
फरवरी 2026 में शीतलहर नहीं चली, तापमान रहा सामान्य से ऊपर; मार्च से कई राज्यों में हीटवेव के ज्यादा दिन पड़ने की आशंका
देश में मौसम का मिज़ाज तेज़ी से बदल रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 में पूरे भारत में वर्षा 2001 के बाद सबसे कम दर्ज की गई। हैरानी की बात यह रही कि पूरे महीने में कहीं भी शीत लहर की स्थिति नहीं बनी और दिन रात का तापमान सामान्य से ऊपर बना रहा।
IMD के मासिक आउटलुक के अनुसार मार्च से मई के बीच देश के अधिकतर हिस्सों में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने के आसार हैं। इस दौरान हीटवेव (लू) के दिन भी बढ़ सकते हैं। पश्चिम राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में लू का जोखिम खास तौर पर ज्यादा रहने की संभावना जताई गई है।
IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने चेतावनी दी है कि मार्च–अप्रैल–मई के दौरान बढ़ता तापमान सार्वजनिक स्वास्थ्य, जल संसाधनों और बिजली की मांग पर अतिरिक्त दबाव बना सकता है। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों, पहले से बीमार लोगों और खुले में काम करने वाले श्रमिकों के लिए यह मौसम ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
IMD का कहना है कि मार्च में देश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य या उससे थोड़ा कम रह सकता है, लेकिन पूर्वोत्तर भारत, पूर्वी भारत और कुछ मध्य व प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में तापमान सामान्य से अधिक रहने की आशंका है। बारिश की बात करें तो मार्च में देशभर में औसत वर्षा सामान्य रहने का अनुमान है, हालांकि पूर्वोत्तर भारत और उत्तर-पश्चिम तथा पूर्व-मध्य भारत के कुछ इलाकों में कम बारिश हो सकती है।
IMD के अनुसार फिलहाल प्रशांत महासागर में कमजोर ला नीना की स्थिति बनी हुई है, लेकिन आने वाले महीनों में ENSO तटस्थ स्थिति में लौट सकता है। विभाग ने यह भी बताया कि फरवरी 2026 न सिर्फ कम बारिश वाला महीना रहा, बल्कि 1901 के बाद के सबसे गर्म फरवरी महीनों में से एक दर्ज किया गया।
कुल मिलाकर, मौसम विभाग के संकेत साफ हैं आने वाले महीनों में गर्मी और उससे जुड़ी चुनौतियों के लिए देश को पहले से सतर्क रहने की जरूरत है।
What's Your Reaction?

