इज़राइल–ईरान का तनाव बढ़ा, भारत के लिए मुश्किलें भी तेज़
सालेहा वसीम
मध्य-पूर्व में इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब बड़े संघर्ष में बदलता दिख रहा है। दोनों देशों के बीच हुए हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा हालात बिगड़े हैं और इसका सीधा असर भारत पर भी पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इज़राइल यात्रा के दौरान 17 समझौते किए गए और भारत ने खुलकर इज़राइल का समर्थन भी जताया। कनेसेट में भाषण देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि “भारत इज़राइल के साथ है।” इसी दौरान ईरान ने भारत से फ़लस्तीन मुद्दा उठाने की अपील की थी, लेकिन भारतीय पक्ष ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अब कूटनीतिक दुविधा में है एक तरफ़ इज़राइल के साथ बढ़ती साझेदारी, दूसरी तरफ़ ईरान के साथ पुराने रणनीतिक संबंध।
सबसे बड़ी चिंता तेल आपूर्ति को लेकर है। भारत की लगभग 50% तेल सप्लाई होर्मुज़ स्ट्रेट जैसे संवेदनशील रूट से होकर आती है। विद्रोहियों ने इन रूटों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है, जिससे आने वाले दिनों में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा है। इज़राइल में मौजूद भारतीयों के लिए एडवाइज़री जारी कर दी गई है और हालात बिगड़ने पर निकासी चुनौती बन सकती है।
माना जा रहा है कि यह तनाव भारत–ईरान संबंधों को और कमजोर कर सकता है और भारत को आने वाले समय में ऊर्जा और कूटनीति दोनों मोर्चों पर कठिन फैसले लेने पड़ सकते हैं।
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