हक़’: आस्था से अलग सत्ता और व्यवस्था पर केंद्रित सवाल
उफ़क साहिल
यामी गौतम और इमरान हाशमी की मुख्य भूमिकाओं वाली फिल्म ‘हक़’ एक कोर्टरूम ड्रामा है, जो भारतीय समाज से जुड़े कुछ संवेदनशील मुद्दों को सामने लाती है। फिल्म की कहानी कानून, धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक ढांचे के बीच के संबंधों को दर्शाती है। यह फिल्म शाह बानो मामले से प्रेरित बताई जा रही है, हालांकि इसमें किसी विशेष धर्म या आस्था पर सीधी टिप्पणी नहीं की गई है।
कहानी एक महिला के कानूनी संघर्ष पर केंद्रित है, जो अपने अधिकारों और सामाजिक मान्यता की मांग करती है। फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह व्यक्तिगत कानूनों और उनकी व्याख्याओं का असर महिलाओं के अधिकारों पर पड़ता है। यामी गौतम द्वारा निभाया गया किरदार इस कानूनी लड़ाई का केंद्र है।
इमरान हाशमी फिल्म में एक ऐसे पात्र की भूमिका निभाते हैं, जो न्यायिक प्रक्रिया, सामाजिक दबावों और राजनीतिक पहलुओं से जुड़ा हुआ है। उनके किरदार के माध्यम से अदालत से बाहर मौजूद परिस्थितियों और प्रभावों को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया है।
फिल्म संयमित भाषा और संतुलित प्रस्तुति के साथ सामाजिक और कानूनी मुद्दों को पेश करती है। ‘हक़’ को एक ऐसी फिल्म के रूप में देखा जा रहा है जो मनोरंजन के साथ-साथ समकालीन सामाजिक बहसों को भी दर्शकों के सामने रखती है।
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