भारत को समझने और समझाने वाली कलम खामोश: मार्क टुली का निधन
वरिष्ठ पत्रकार और लेखक मार्क टुली के निधन से पत्रकारिता जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। बीबीसी में अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने भारत की राजनीति, समाज और संस्कृति को गहराई से समझते हुए निष्पक्ष रिपोर्टिंग की। भारत-पाक युद्ध, आपातकाल और बाबरी मस्जिद जैसे अहम घटनाक्रमों पर उनकी पत्रकारिता और भारत पर लिखी किताबें आज भी प्रेरणास्रोत हैं।
Shaista azmi
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और भारत के गहरे जानकार मार्क टुली के निधन से पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। मार्क टुली उन चुनिंदा विदेशी पत्रकारों में थे जिन्होंने भारत को केवल एक देश के रूप में नहीं, बल्कि उसकी आत्मा, संस्कृति और जटिल सामाजिक संरचना के रूप में समझा और दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। बीबीसी के साथ अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने भारत-पाक युद्ध, आपातकाल, ऑपरेशन ब्लू स्टार, बाबरी मस्जिद विध्वंस जैसी ऐतिहासिक घटनाओं की निष्पक्ष और संवेदनशील रिपोर्टिंग की। नई दिल्ली ब्यूरो प्रमुख के रूप में उन्होंने लगभग तीन दशकों तक दक्षिण एशिया की राजनीति और समाज पर गहरी पकड़ के साथ रिपोर्टिंग की। उनकी लेखनी में भारत की आम जनता, गांव, आस्था और परंपराओं की स्पष्ट झलक मिलती थी। नो फुल स्टॉप्स इन इंडिया और इंडिया इन स्लो मोशन जैसी उनकी पुस्तकें आज भी भारत को समझने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। भारत सरकार द्वारा पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित मार्क टुली पत्रकारिता की उस परंपरा के प्रतीक थे, जिसमें सत्य, संतुलन और संवेदनशीलता सर्वोपरि होती है। उनके निधन से पत्रकारिता, साहित्य और भारत-अध्ययन के क्षेत्र में एक अपूरणीय क्षति हुई है, लेकिन उनके विचार और कार्य सदैव प्रेरणा देते रहेंगे।
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