“रहमान के बयान पर कलाकारों की दो टूक - पहले क्रिएटिविटी, पैसा बाद में”
ए.आर. रहमान के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए हरिहरन और लेस्ली लुईस ने कहा कि कला में सबसे पहले क्रिएटिविटी और सामाजिक जिम्मेदारी होनी चाहिए, पैसे की सोच बाद में।
शायना जमील
संगीतकार ए.आर. रहमान के हालिया ‘सांप्रदायिक’ बयान को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। इस बयान पर अब संगीत जगत के दो वरिष्ठ और प्रतिष्ठित नाम—गायक हरिहरन और म्यूज़िक कंपोज़र लेस्ली लुईस—ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। दोनों कलाकारों ने इस मुद्दे को केवल बयान तक सीमित न रखते हुए कला और रचनात्मकता के व्यापक संदर्भ में देखा है।
हरिहरन ने कहा कि संगीत की ताकत लोगों को जोड़ने में है। उनके अनुसार, एक कलाकार की पहली जिम्मेदारी यह होती है कि उसकी रचना समाज में सकारात्मक संदेश दे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब कला को केवल व्यावसायिक नजरिए से देखा जाता है, तब उसकी आत्मा कमजोर पड़ जाती है। इसलिए कलाकारों को पहले अपनी क्रिएटिविटी और संवेदनशीलता पर ध्यान देना चाहिए, न कि पैसों पर।
वहीं लेस्ली लुईस ने कहा कि कला ईमानदारी और खुले विचारों से ही सार्थक बनती है। उन्होंने माना कि आज के दौर में पैसा और लोकप्रियता महत्वपूर्ण हो गए हैं, लेकिन यदि रचनात्मक सोच पीछे छूट जाए तो कला का असली उद्देश्य खत्म हो जाता है। लेस्ली के अनुसार, कलाकारों को सामाजिक मुद्दों पर बोलते समय संतुलन और जिम्मेदारी बनाए रखनी चाहिए।
दोनों कलाकारों की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब ए.आर. रहमान के बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। संगीत जगत में हरिहरन और लेस्ली लुईस की बातों को एक परिपक्व और संतुलित नजरिए के तौर पर देखा जा रहा है, जो यह याद दिलाता है कि कला का मूल उद्देश्य समाज को जोड़ना और सकारात्मक संवाद स्थापित करना है।
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