अभिव्यक्ति की आज़ादी या अवमानना? AI समिट में बढ़ी सियासी तकरार
उफ़क साहिल
नई दिल्ली: राजधानी में आयोजित AI समिट का मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए देश के भविष्य, डिजिटल विकास और नई तकनीक पर चर्चा करना था। लेकिन यह कार्यक्रम राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच AI के इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ AI से बने वीडियो और पोस्ट वायरल हुए। विपक्ष का कहना है कि इनका उपयोग राजनीतिक छवि खराब करने के लिए किया जा रहा है। वहीं सत्ताधारी दल का कहना है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है और तकनीक को गलत तरीके से दोष नहीं देना चाहिए।
शिकायतें लोक सभा स्पीकर तक पहुंच चुकी हैं। कुछ नेताओं ने इसे सदन की गरिमा से जुड़ा मुद्दा बताते हुए विशेषाधिकार हनन का मामला कहा है। इस विषय को समिति के पास भेजने पर विचार किया जा रहा है।
कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि AI का दुरुपयोग कर भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने जवाब देते हुए कहा कि जरूरी है कि तकनीक का जिम्मेदारी से इस्तेमाल हो और डिजिटल साक्षरता बढ़ाई जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI एक साधन है, उसका असर इस पर निर्भर करता है कि उसे कैसे इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को स्पष्ट नियम और दिशानिर्देश बनाने चाहिए, ताकि अभिव्यक्ति की आज़ादी और कानून के बीच संतुलन बना रहे।
इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज है। लोग अलग-अलग राय दे रहे हैं। कुछ इसे लोकतंत्र की मजबूती मानते हैं, तो कुछ इसे गलत इस्तेमाल बता रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या AI से बने कंटेंट के लिए अलग नियम बनेंगे? और क्या राजनीतिक दलों के लिए कोई आचार संहिता तय की जाएगी? आने वाले समय में इस पर फैसला साफ हो सकता है।
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