बिहार में पोस्ट-डॉक्टोरल शोध नीति पर सियासी सरगर्मी तेज राज्यपाल से मिला प्रतिनिधिमंडल, उच्च शिक्षा में सुधार की उठी मांग
उफ़क साहिल
पटना, 19 फरवरी 2026: बिहार के विश्वविद्यालयों में शोध और नवाचार को नई दिशा देने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। युवा जदयू के प्रदेश महासचिव संदीप ठाकुर ने आज लोकभवन में राज्यपाल सह कुलाधिपति आरिफ़ मोहम्मद खान से मुलाकात कर राज्य में सुदृढ़ पोस्ट-डॉक्टोरल शोध व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई। उन्होंने एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए उच्च शिक्षा में संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।
ठाकुर ने कहा कि स्पष्ट और एकीकृत पोस्ट-डॉक्टोरल नीति के अभाव में बिहार के प्रतिभाशाली युवा शोधकर्ता अन्य राज्यों और विदेशों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि राज्य के कई विश्वविद्यालयों में शोध के लिए आधारभूत संरचना, फंडिंग और मार्गदर्शन की कमी है, जिससे गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान प्रभावित हो रहा है।
वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय का उदाहरण
उन्होंने वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थापना के बाद से वहां पोस्ट-डॉक्टोरल स्तर पर शोध गतिविधियां नगण्य रही हैं। उनके अनुसार, यदि समय रहते नीति नहीं बनाई गई तो बिहार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ सकता है।
NEP-2020 के अनुरूप नीति बनाने की मांग
ज्ञापन में सुझाव दिया गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP-2020) के तहत राज्य में एकीकृत पोस्ट-डॉक्टोरल शोध नीति अधिसूचित की जाए। इससे विश्वविद्यालयों में अनुसंधान संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और उद्योग–शिक्षा सहयोग को भी नई दिशा मिल सकेगी।
अनुसंधान को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि राज्य सरकार विशेष शोध अनुदान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग कार्यक्रम और मेरिट-आधारित फेलोशिप की व्यवस्था करे। उनका कहना है कि इससे बिहार के विश्वविद्यालय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे तथा राज्य की वैश्विक शैक्षणिक पहचान मजबूत होगी।
राजभवन सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और इस विषय पर शिक्षा विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मंगाने का आश्वासन दिया है।
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