“ओटीटी कंटेंट पर अंतिम फैसला जनता का” — मोहन भागवत
उफ़क साहिल
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहे धार्मिक और सांस्कृतिक कंटेंट को लेकर संतुलित दृष्टिकोण रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में दर्शकों के पास विकल्पों की भरमार है और यह समाज पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार की सामग्री को स्वीकार या अस्वीकार करता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार का कठोर नियंत्रण समाधान नहीं है, बल्कि जागरूकता और आत्मनियंत्रण अधिक प्रभावी उपाय हैं। उनके अनुसार, इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री का प्रभाव व्यापक होता है, इसलिए कंटेंट निर्माताओं और दर्शकों दोनों को जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
“स्वतंत्रता और संयम साथ-साथ चलें”
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है, लेकिन यह असीमित नहीं हो सकती। समाज की आस्थाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान करते हुए सृजनात्मकता को आगे बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि सकारात्मक कहानियां और प्रेरणादायक विषय समाज को दिशा देने का काम कर सकते हैं।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ओटीटी प्लेटफॉर्म अब केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गए हैं, बल्कि वे सामाजिक सोच और युवाओं की मानसिकता को भी प्रभावित करते हैं। ऐसे में कंटेंट की गुणवत्ता और उसके सामाजिक प्रभाव पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है।
धार्मिक प्रतीकों की प्रस्तुति को लेकर उन्होंने कहा कि किसी भी परंपरा को दिखाते समय संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। विवादों से बचने के लिए समाज, रचनाकारों और प्लेटफॉर्म के बीच खुला संवाद होना जरूरी है।
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