क्या ईरान ने अमेरिका को चकमा देने के लिए जमीन पर बना दिए नकली एयरबेस? सोशल मीडिया पर दावों से मची बहस
मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि ईरान ने दुश्मनों को भ्रमित करने के लिए जमीन पर लड़ाकू विमान और एयरबेस जैसे नकली डिजाइन बनाए। कहा जा रहा है कि इससे दुश्मन असली ठिकानों की जगह नकली टारगेट पर हमला कर सकते हैं। हालांकि इन दावों की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस जारी है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से चर्चा में है। कहा जा रहा है कि ईरान ने दुश्मनों को भ्रमित करने के लिए जमीन पर ही लड़ाकू विमानों और एयरबेस जैसे डिजाइन बना दिए, ताकि दुश्मन असली ठिकानों के बजाय नकली टारगेट पर हमला कर दे। इन दावों के सामने आने के बाद इंटरनेट पर इसको लेकर तीखी बहस छिड़ गई है।
दावे के मुताबिक ईरान की खुफिया एजेंसियों ने जमीन पर खास तरह के थर्मल पेंट से एफ-14 जैसे लड़ाकू विमानों की आकृति तैयार की। कहा जा रहा है कि ऊपर से देखने या सैटेलाइट इमेज में ये डिजाइन असली विमान की तरह दिखाई देते हैं। इस रणनीति का मकसद कथित तौर पर दुश्मन की मिसाइलों और बमों को असली सैन्य ठिकानों से दूर रखना बताया जा रहा है।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि हमले से पहले असली लड़ाकू विमानों को सुरक्षित स्थानों या भूमिगत ठिकानों पर शिफ्ट कर दिया गया था। हालांकि इन दावों की आधिकारिक तौर पर किसी भी स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है।
दरअसल हाल ही में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले की खबरें सामने आई थीं। इन हमलों के बाद कई शहरों में भारी तबाही और बड़ी संख्या में लोगों की मौत की रिपोर्ट भी सामने आई। इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच यह दावा इंटरनेट पर तेजी से फैल गया।
सोशल मीडिया पर लोग इस दावे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ यूजर्स इसे ईरान की चालाक सैन्य रणनीति बता रहे हैं, तो कई लोग इसे पुराना या भ्रामक बता रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि अगर वास्तव में असली विमानों पर हमला हुआ होता तो वहां मलबा दिखाई देता, जबकि ऐसा कोई सबूत सामने नहीं आया है।
कुछ यूजर्स ने तकनीकी आधार पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सिर्फ जमीन पर पेंट से आकृति बनाने से असली थर्मल सिग्नेचर तैयार नहीं होता, इसलिए इस तरह की कहानी पर पूरी तरह भरोसा करना मुश्किल है।
कुल मिलाकर यह मामला अभी भी दावों और चर्चाओं तक ही सीमित है। आधिकारिक पुष्टि के अभाव में यह कहना मुश्किल है कि जमीन पर बनाए गए इन कथित सैन्य डिजाइन का दावा कितना सच है और कितना भ्रम।

