अमेरिका, इज़रायल या ईरान… किसके पास सबसे ज्यादा जमीनी सैनिक? ग्राउंड ऑपरेशन की अटकलों के बीच जानिए पूरी तस्वीर

अमेरिका, इज़रायल या ईरान… किसके पास सबसे ज्यादा जमीनी सैनिक? ग्राउंड ऑपरेशन की अटकलों के बीच जानिए पूरी तस्वीर

खुशबू खातून 

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और संभावित ग्राउंड ऑपरेशन की चर्चाओं के बीच दुनिया की नजरें तीन देशों—अमेरिका, इज़रायल और ईरान—की सैन्य ताकत पर टिकी हुई हैं। खासकर जमीनी सैनिकों (ग्राउंड फोर्स) की संख्या को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इन तीनों देशों में किसके पास सबसे ज्यादा सैनिक हैं और युद्ध की स्थिति में कौन कितना मजबूत है।

सैन्य आंकड़ों के अनुसार, ईरान के पास जमीनी सैनिकों की संख्या सबसे अधिक मानी जाती है। ईरान की नियमित सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को मिलाकर उसके पास लगभग 5 से 6 लाख सक्रिय सैनिक हैं। इसके अलावा ईरान के पास बड़ी संख्या में रिजर्व फोर्स और अर्धसैनिक बल भी मौजूद हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर युद्ध में उतारा जा सकता है। इस वजह से जमीनी युद्ध के मामले में ईरान की स्थिति काफी मजबूत मानी जाती है।

वहीं अमेरिका की बात करें तो उसके पास कुल मिलाकर करीब 13 लाख सक्रिय सैनिक हैं, लेकिन इनमें से जमीनी सेना यानी यूएस आर्मी के लगभग 4.5 से 5 लाख सैनिक ही सीधे ग्राउंड ऑपरेशन के लिए होते हैं। हालांकि अमेरिका की असली ताकत उसकी अत्याधुनिक तकनीक, एयर पावर, मिसाइल सिस्टम और वैश्विक सैन्य ठिकानों का नेटवर्क है, जिसकी वजह से वह दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं में गिना जाता है।

दूसरी ओर इज़रायल की सेना संख्या के लिहाज से छोटी जरूर है, लेकिन उसे दुनिया की सबसे प्रशिक्षित और आधुनिक सेनाओं में गिना जाता है। इज़रायल के पास करीब 1.7 लाख सक्रिय सैनिक हैं, जबकि उसके 4 लाख से ज्यादा रिजर्व सैनिक हैं, जिन्हें आपात स्थिति में तुरंत बुलाया जा सकता है। इज़रायल की सैन्य रणनीति तेज और सटीक कार्रवाई पर आधारित होती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर केवल जमीनी सैनिकों की संख्या की बात की जाए तो ईरान इस मामले में आगे है। लेकिन तकनीक, हथियारों की गुणवत्ता और वैश्विक सैन्य क्षमता के मामले में अमेरिका सबसे शक्तिशाली माना जाता है, जबकि इज़रायल अपनी रणनीति, प्रशिक्षण और आधुनिक हथियारों के कारण क्षेत्रीय स्तर पर बेहद प्रभावशाली सेना रखता है।

मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच इन तीनों देशों की सैन्य ताकत और रणनीति आने वाले समय में क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर बड़ा असर डाल सकती है। ऐसे में दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि हालात किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।