इंसानी जिस्म को गलाने वाली सफेद मौत: किन-किन युद्धों में व्हाइट फॉस्फोरस बम ने मचाया कहर?

व्हाइट फॉस्फोरस एक ऐसा हथियार है जो युद्ध में धुआँ या रोशनी बनाने के लिए बनाया गया था, लेकिन जब इसे सीधे हमले के रूप में इस्तेमाल किया जाता है तो यह इंसानी शरीर को भयानक तरीके से जला देता है। इसी वजह से इसे अक्सर “सफेद मौत” कहा जाता है और इसके इस्तेमाल पर दुनिया भर में लगातार बहस चलती रहती है।

इंसानी जिस्म को गलाने वाली सफेद मौत: किन-किन युद्धों में व्हाइट फॉस्फोरस बम ने मचाया कहर?

व्हाइट फॉस्फोरस एक बेहद खतरनाक रासायनिक पदार्थ है जिसे सैन्य हथियारों में इस्तेमाल किया जाता है। इसे अक्सर सफेद मौत कहा जाता है क्योंकि यह हवा के संपर्क में आते ही जलने लगता है और जिस चीज़ पर गिरता है उसे बुरी तरह जला देता है। अगर यह इंसानी शरीर पर गिर जाए तो यह मांस को गलाते हुए हड्डियों तक पहुँच सकता है और कई बार पानी डालने पर भी इसकी आग तुरंत नहीं बुझती।

हालाँकि कई देशों का कहना है कि इसे मुख्य रूप से धुआँ बनाने या रोशनी देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है लेकिन युद्ध के दौरान इसका इस्तेमाल कई बार सीधे हमले के रूप में भी हुआ है जिससे भारी तबाही और मानवीय संकट पैदा हुआ।

नीचे कुछ बड़े युद्ध हैं जहाँ व्हाइट फॉस्फोरस के इस्तेमाल को लेकर गंभीर आरोप लगे या इसके इस्तेमाल की पुष्टि हुई।

 वियतनाम युद्ध (1955–1975)

वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना ने कई तरह के रासायनिक और आग लगाने वाले हथियारों का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट्स के अनुसार व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल दुश्मन के ठिकानों को जलाने और जंगलों में छिपे सैनिकों को बाहर निकालने के लिए किया गया।

इसके गिरने के बाद जमीन और पेड़ों में आग लग जाती थी और आसपास मौजूद लोगों को गंभीर जलन और घातक चोटें लगती थीं। इस युद्ध के बाद दुनिया में ऐसे हथियारों के खिलाफ आवाज़ और तेज़ हुई।

इराक युद्ध (2004 – फल्लूजा)

2004 में इराक के फल्लूजा शहर की लड़ाई के दौरान अमेरिकी सेना पर व्हाइट फॉस्फोरस इस्तेमाल करने के आरोप लगे। बाद में अमेरिकी सेना ने स्वीकार किया कि इस पदार्थ का इस्तेमाल दुश्मन को छिपने की जगह से बाहर निकालने के लिए किया गया था।

मानवाधिकार संगठनों ने कहा कि घनी आबादी वाले इलाके में ऐसे हथियारों का इस्तेमाल नागरिकों के लिए बेहद खतरनाक होता है और इससे गंभीर मानवीय नुकसान हो सकता है।

गाज़ा संघर्ष

गाज़ा में इज़राइल और फिलिस्तीन के संघर्ष के दौरान भी कई बार व्हाइट फॉस्फोरस के इस्तेमाल के आरोप लगे हैं। 2008–09 के गाज़ा युद्ध में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने दावा किया कि घनी आबादी वाले इलाकों में व्हाइट फॉस्फोरस गिराया गया।

बाद में इस पर वैश्विक स्तर पर काफी विवाद हुआ और कई संगठनों ने इसकी जांच और प्रतिबंध की मांग की।

 यूक्रेन युद्ध (2022–अब तक)

रूस-यूक्रेन युद्ध में भी कई बार व्हाइट फॉस्फोरस इस्तेमाल होने के आरोप लगे हैं। यूक्रेन ने रूस पर और रूस ने यूक्रेन पर ऐसे हथियार इस्तेमाल करने के आरोप लगाए हैं।

हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र जांच कई मामलों में अभी भी विवादित है, लेकिन युद्ध में इस तरह के हथियारों के इस्तेमाल को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी है।

क्या व्हाइट फॉस्फोरस बम प्रतिबंधित है?

व्हाइट फॉस्फोरस पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं है लेकिन संयुक्त राष्ट्र के Convention on Certain Conventional Weapons (CCW) के तहत इसके इस्तेमाल पर कड़े नियम हैं।