नई स्टडी का बड़ा दावा: AI तकनीक से सोशल मीडिया के गुमनाम अकाउंट्स की पहचान हो सकती है उजागर, ऑनलाइन गतिविधियों से मिल सकते हैं असली यूज़र के सुराग
एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि AI तकनीक सोशल मीडिया के गुमनाम अकाउंट्स की पहचान का अंदाजा लगा सकती है। AI यूज़र के लिखने के तरीके, भाषा के पैटर्न और ऑनलाइन गतिविधियों का विश्लेषण करके अलग-अलग अकाउंट्स के बीच संबंध खोज सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस तकनीक से साइबर अपराध पकड़ने में मदद मिल सकती है, लेकिन इससे डिजिटल प्राइवेसी को लेकर चिंता भी बढ़ सकती है।
अमीर हम्ज़ह
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि आधुनिक AI मॉडल सोशल मीडिया पर चल रहे गुमनाम अकाउंट्स के पीछे मौजूद असली व्यक्ति की पहचान का अंदाजा लगाने में सक्षम हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार शोधकर्ताओं ने पाया कि AI किसी यूज़र की ऑनलाइन गतिविधियों, लिखने के अंदाज़ और डिजिटल व्यवहार का विश्लेषण करके अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर मौजूद अकाउंट्स के बीच संबंध खोज सकता है।
शोध में बताया गया कि AI एल्गोरिद्म सोशल मीडिया पोस्ट, भाषा के पैटर्न, इस्तेमाल किए गए शब्दों और पोस्ट करने के समय जैसी कई चीजों का विश्लेषण करते हैं। इन संकेतों को मिलाकर AI यह अनुमान लगा सकता है कि किसी गुमनाम या छिपे हुए अकाउंट के पीछे कौन व्यक्ति हो सकता है। अगर कोई यूज़र अलग-अलग नामों से कई प्लेटफॉर्म पर अकाउंट चलाता है, तो AI उनके बीच मौजूद समानताओं को पहचानकर संभावित पहचान तक पहुंच सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस तरह की तकनीक साइबर अपराध, ऑनलाइन ट्रोल नेटवर्क और दुष्प्रचार फैलाने वाले संगठित अकाउंट्स की पहचान करने में मददगार हो सकती है। जांच एजेंसियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए यह तकनीक संदिग्ध गतिविधियों को समझने और डिजिटल अपराधों पर नजर रखने में उपयोगी साबित हो सकती है।
हालांकि विशेषज्ञों ने इसके साथ-साथ प्राइवेसी को लेकर गंभीर चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि अगर AI का इस्तेमाल बिना स्पष्ट नियमों और निगरानी के किया गया, तो इससे लोगों की डिजिटल गोपनीयता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है। इसलिए कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तकनीकों के उपयोग के लिए मजबूत कानूनी ढांचा और स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी होंगे।
शोधकर्ताओं का कहना है कि फिलहाल यह तकनीक अनुसंधान और प्रयोग के चरण में है, लेकिन आने वाले समय में AI आधारित विश्लेषण सोशल मीडिया सुरक्षा और डिजिटल जांच के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपकरण बन सकता है। इसके साथ ही यह भी जरूरी होगा कि तकनीकी प्रगति और लोगों की निजता के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखा जाए।

