क्या भारत में फिर आ सकता है LPG संकट? गैस की बढ़ती मांग और वैश्विक हालात ने क्यों बढ़ाई चिंता

भारत में एलपीजी की मांग लगातार बढ़ रही है और बड़ी मात्रा में गैस का आयात किया जाता है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण समय-समय पर आपूर्ति पर दबाव बन सकता है, हालांकि फिलहाल देश में बड़े स्तर का LPG संकट नहीं है।

क्या भारत में फिर आ सकता है LPG संकट? गैस की बढ़ती मांग और वैश्विक हालात ने क्यों बढ़ाई चिंता

अमीर हमज़ह 

भारत में रसोई गैस यानी एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas) आज करोड़ों घरों की रोज़मर्रा की जरूरत बन चुकी है। शहरों से लेकर गांवों तक खाना पकाने के लिए बड़ी आबादी इसी ईंधन पर निर्भर है। पिछले कुछ दशकों में सरकार की योजनाओं और गैस कनेक्शन के विस्तार के कारण एलपीजी का उपयोग तेजी से बढ़ा है। लेकिन समय-समय पर आपूर्ति में दबाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण गैस की उपलब्धता को लेकर चिंता भी सामने आती रही है।

भारत में एलपीजी की मांग लगातार बढ़ती रही है। खासतौर पर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के बाद ग्रामीण इलाकों में भी बड़ी संख्या में नए गैस कनेक्शन दिए गए, जिससे देश में उपभोक्ताओं की संख्या करोड़ों तक पहुंच गई। मांग में इस तेज वृद्धि के कारण कई बार स्थानीय स्तर पर सिलेंडर की डिलीवरी में देरी या सप्लाई दबाव जैसी स्थितियां भी देखी गई हैं। हालांकि तेल कंपनियां आमतौर पर इसे जल्दी नियंत्रित कर लेती हैं।

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार भारत अपनी एलपीजी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। इसलिए वैश्विक ऊर्जा बाजार में होने वाले बदलाव का असर घरेलू गैस बाजार पर भी पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, भू-राजनीतिक तनाव या आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट जैसे कारक गैस की उपलब्धता और कीमत दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।

हाल के वर्षों में वैश्विक ऊर्जा बाजार में कई बड़े बदलाव देखे गए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व में तनाव और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता ने कई देशों की ऊर्जा नीति को प्रभावित किया है। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए यह स्थिति अतिरिक्त चुनौती पैदा कर सकती है, क्योंकि घरेलू मांग लगातार बढ़ रही है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल भारत में व्यापक स्तर पर एलपीजी संकट जैसी स्थिति नहीं है। सरकारी तेल कंपनियां उत्पादन, आयात और वितरण के जरिए आपूर्ति संतुलित रखने की कोशिश करती रहती हैं। इसके साथ ही भंडारण क्षमता बढ़ाने और वितरण नेटवर्क को मजबूत करने पर भी काम किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी भी संभावित दबाव से निपटा जा सके।

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों और बेहतर आपूर्ति प्रबंधन की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। अगर मांग इसी तरह बढ़ती रही तो सरकार और ऊर्जा कंपनियों को दीर्घकालिक रणनीति के साथ गैस आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना होगा, ताकि देश की करोड़ों रसोइयों की लौ लगातार जलती रहे।