Iran Conflict: ट्रंप की बदलती रणनीति से बढ़ी अनिश्चितता, युद्ध का एंडगेम अब भी साफ नहीं
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को रोकना है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध का अंतिम लक्ष्य अभी स्पष्ट नहीं है। अगर संघर्ष लंबा चला तो इसका असर वैश्विक राजनीति, तेल बाजार और भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने मध्य-पूर्व की स्थिति को और जटिल बना दिया है। विश्लेषकों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Tramp की बदलती रणनीति के कारण यह समझना मुश्किल हो गया है कि इस संघर्ष का अंतिम उद्देश्य क्या है। कुछ बयानों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने की बात कही जा रही है, जबकि कुछ संकेत ईरान की सैन्य ताकत को पूरी तरह कमजोर करने की ओर इशारा करते हैं।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को रोकना उसकी प्राथमिकता है। अमेरिका का दावा है कि उसने पहले कूटनीतिक रास्ते से ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश की थी, लेकिन जब ईरान ने अमेरिकी मांगों को स्वीकार नहीं किया, तब सैन्य कार्रवाई को जरूरी माना गया।हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की रणनीति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यदि लक्ष्य केवल ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों और परमाणु सुविधाओं को नुकसान पहुंचाना है, तो यह संघर्ष सीमित समय तक चल सकता है। लेकिन यदि उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को व्यापक रूप से कमजोर करना या वहां राजनीतिक बदलाव लाना है, तो यह टकराव लंबे समय तक जारी रह सकता है।
इस अनिश्चितता का असर वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ रहा है। मध्य-पूर्व दुनिया के प्रमुख तेल और गैस उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। ऐसे में किसी भी बड़े संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर पड़ना लगभग तय माना जाता है।
भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। अगर संघर्ष लंबा चलता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिससे भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दाम बढ़ने की संभावना रहती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में अमेरिका की रणनीति और ईरान की प्रतिक्रिया इस संघर्ष की दिशा तय करेगी। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह तनाव कूटनीति के जरिए कम होगा या फिर यह लंबे समय तक चलने वाला संकट बन जाएगा।
Shaekh Arshi

