सुप्रीम कोर्ट ने सिन्हा लाइब्रेरी अधिनियम को किया खारिज, ट्रस्ट को वापस मिली प्रबंधन की जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने सिन्हा लाइब्रेरी अधिनियम को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया और लाइब्रेरी के प्रबंधन की जिम्मेदारी फिर से सिन्हा लाइब्रेरी ट्रस्ट को सौंपने का आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने सिन्हा लाइब्रेरी अधिनियम को किया खारिज, ट्रस्ट को वापस मिली प्रबंधन की जिम्मेदारी

बिहार की ऐतिहासिक संस्था सिन्हा लाइब्रेरी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने सिन्हा पुस्तकालय से संबंधित राज्य द्वारा बनाए गए अधिनियम को असंवैधानिक मानते हुए उसे निरस्त कर दिया। इसके साथ ही न्यायालय ने पुस्तकालय के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी पुनः सिन्हा लाइब्रेरी ट्रस्ट को सौंपने का आदेश दिया है।

न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि यह पुस्तकालय मूल रूप से एक ट्रस्ट द्वारा स्थापित किया गया था और उसकी संपत्ति भी ट्रस्ट के अधीन आती है। राज्य द्वारा बनाए गए अधिनियम के माध्यम से ट्रस्ट के अधिकारों में हस्तक्षेप किया गया जो विधिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी निजी ट्रस्ट की संपत्ति और उसके प्रबंधन पर इस प्रकार नियंत्रण स्थापित करना संविधान के सिद्धांतों के विरुद्ध है।

इस मामले को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा था। ट्रस्ट का कहना था कि राज्य सरकार के हस्तक्षेप के कारण पुस्तकालय के मूल उद्देश्य और उसकी स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है। अब उच्चतम न्यायालय के इस निर्णय के बाद ट्रस्ट को दोबारा पुस्तकालय के संचालन का पूरा अधिकार मिल गया है।

माना जा रहा है कि इस फैसले से पुस्तकालय के संरक्षण, विकास और व्यवस्थापन में नई गति आएगी तथा इसे अपने मूल स्वरूप में आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।