महिलाओं की सुरक्षा पर उठे सवाल: वर्कप्लेस से जुड़े मामलों का खुलासा

महिलाओं की सुरक्षा पर उठे सवाल: वर्कप्लेस से जुड़े मामलों का खुलासा

सालेहा वसीम 

भारत में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस तेज हुई है। संसद में पेश सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 के दौरान 254 महिलाओं ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के SHe-Box पोर्टल के जरिए दर्ज कराई।

यह जानकारी राज्यसभा में पूछे गए एक लिखित प्रश्न के जवाब में Savitri Thakur, जो महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री हैं, ने साझा की।

सरकार के मुताबिक, 29 अगस्त 2024 को SHe-Box पोर्टल को नए स्वरूप में फिर से शुरू किया गया था, ताकि कार्यस्थल पर महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों की निगरानी और शिकायत प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इस पोर्टल के दोबारा लॉन्च होने के बाद से अब तक कुल 296 शिकायतें दर्ज की गई हैं।

आंकड़ों के अनुसार, 6 फरवरी 2026 तक 21 नई शिकायतें प्राप्त हुईं, जबकि अब तक दर्ज कुल मामलों में से 105 शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है।

सरकार का कहना है कि यह पोर्टल Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition and Redressal) Act, 2013 यानी POSH इस कानून को बेहतर तरीके से लागू करने और प्रक्रिया को साफ रखने के लिए इसे बनाया गया है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से महिलाएं सरकारी, निजी या किसी भी क्षेत्र के कार्यस्थल से जुड़ी शिकायत एक ही ऑनलाइन मंच के जरिए दर्ज कर सकती हैं।

मंत्रालय के अनुसार, यह प्रणाली शिकायतकर्ताओं की गोपनीयता बनाए रखते हुए प्रक्रिया को आसान बनाती है और शिकायतों की रीयल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा भी देती है, जिससे संबंधित अधिकारियों के लिए मामलों की निगरानी करना संभव हो पाता है।

सरकार ने संसद को यह भी बताया कि देश के 777 जिलों में स्थानीय समितियों (Local Committees) की जानकारी पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है। इनमें से 646 जिलों के जिला अधिकारियों और 624 नोडल अधिकारियों का विवरण भी उपलब्ध कराया गया है।

इसके अलावा, अब तक 1,48,700 से अधिक कार्यस्थलों को इस पोर्टल से जोड़ा जा चुका है, जिनमें लगभग 92,400 सरकारी संस्थान और 56,300 निजी संस्थान शामिल हैं।

इसी के साथ करीब 60,700 आंतरिक समितियों (Internal Committees) ने भी अपनी जानकारी पोर्टल पर अपडेट की है। इनमें से 37,400 समितियां सरकारी संस्थानों और 23,300 निजी संस्थानों से संबंधित हैं।

सरकार के मुताबिक, शिकायतों के निपटारे में देरी न हो इसके लिए पोर्टल पर 30, 60 और 90 दिन के अंतराल पर स्वचालित नोटिफिकेशन भेजे जाते हैं। अगर कोई मामला 90 दिनों से अधिक समय तक लंबित रहता है तो संबंधित अधिकारियों को एसएमएस, ई-मेल और चेतावनी संदेश भेजकर कार्रवाई सुनिश्चित करने की कोशिश की जाती है।

इसी बीच महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक हालिया अध्ययन ने भी चिंता बढ़ाई है। NARI 2025 Report, जिसे National Commission for Women (NCW) ने जारी किया, की देश के 31 शहरों की 12,770 महिलाओं से बातचीत के आधार पर आंकड़े जुटाए गए।

इस सर्वे के मुताबिक, करीब 40 प्रतिशत महिलाओं ने खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस न करने की बात कही। रिपोर्ट यह भी बताती है कि उत्पीड़न के कई मामलों में हर तीन में से केवल एक महिला ही औपचारिक शिकायत दर्ज कराती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज में उनकी भागीदारी पर भी पड़ता है।