जापान का बड़ा फैसला: खाड़ी तनाव के बीच 16 मार्च से रणनीतिक तेल भंडार जारी करेगा देश
सालेहा वसीम
बीते कुछ हफ्तों में मध्य पूर्व में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और तेल की आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंताओं के बीच जापान ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जापान के प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने घोषणा की है कि देश 16 मार्च 2026 से अपने रणनीतिक तेल भंडार का एक हिस्सा जारी करेगा। इसका उद्देश्य ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाना और संभावित सप्लाई संकट से बचाव करना है।
प्रधानमंत्री ने कहा है कि यह निर्णय ग्लोबल ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित कर रहे तनाव के कारण लिया गया है। इससे पहले कई प्रमुख ऊर्जा उपभोक्ता देश संभावित आपातकालीन उपायों पर विचार कर रहे थे, लेकिन जापान ने IEA या G7 के समन्वित निर्णय का इंतज़ार किए बग़ैर जल्द कार्रवाई करने का फैसला किया
सरकार के अनुसार, प्राइवेट सेक्टर के तेल भंडार का 15 दिन का हिस्साऔर सरकारी भंडार का 1 महीने का हिस्सा दुनिया के ऊर्जा बाजार में जारी किया जाएगा, जिससे घरेलू और वैश्विक आपूर्ति को बल मिलेगा।
यह कदम उस समय आया है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। हाल के दिनों में स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से होकर गुजरने वाली तेल शिपमेंट्स पर दबाव पड़ा है, जिससे सप्लाई चेन में जोखिम पैदा हुआ है। जब से इस संवेदनशील पानी के मार्ग पर गतिरोध आया है, उससे कई देशों की आयात निर्भरता के चलते ऊर्जा सुरक्षा पर भी प्रभाव पड़ा है।
विश्लेषकों का कहना है कि जापान का यह कदम उत्पादन और परिवहन में संभावित व्यवधानों के बीच तेल की कीमतों और आपूर्ति को संतुलित रखने की कोशिश है, ताकि घरेलू बाजार और रोज़मर्रा के ईंधन की उपलब्धता पर ज्यादा दबाव न आए।
कई देशों के पास आपातकालीन स्थितियों के लिए रणनीतिक तेल भंडार मौजूद होता है यह एक तरह का “सुरक्षा कुशन” है ताकि प्राकृतिक आपदाओं या युद्ध जैसे तनाव के दौरान तेल की आपूर्ति बाधित न हो। जापान जैसे तेल-आयातक देशों के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
Saleha Wasim

