होर्मुज में तनाव बढ़ा तो क्या होगा? सरकार का प्लान-B तैयार, 40 देशों से तेल सप्लाई का इंतजाम
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने संसद में बताया कि देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए 40 देशों से तेल आयात की व्यवस्था की गई है। इससे किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर भी देश में कच्चे तेल की सप्लाई बनाए रखने में मदद मिलेगी।
अमीर हमज़ह
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सुरक्षा चिंताओं के बीच भारत सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक योजना तैयार कर ली है। संसद में सरकार ने बताया कि अगर होर्मुज मार्ग प्रभावित होता है तो भी देश में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित न हो, इसके लिए भारत ने करीब 40 देशों से तेल आयात की व्यवस्था कर रखी है।
सरकार की ओर से संसद में दी गई जानकारी के अनुसार भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी ऊर्जा रणनीति को काफी विविध बनाया है। पहले जहां भारत की बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई पश्चिम एशिया के सीमित देशों पर निर्भर थी, वहीं अब अमेरिका, रूस, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और अन्य क्षेत्रों से भी कच्चा तेल खरीदा जा रहा है। इससे किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर सप्लाई प्रभावित होने का खतरा कम हो जाता है।
मंत्री ने बताया कि भारत की रिफाइनरियां अलग-अलग प्रकार के कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम हैं, इसलिए देश जरूरत पड़ने पर कई अलग-अलग स्रोतों से तेल मंगाने की क्षमता रखता है। इसके अलावा भारत के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve) भी मौजूद है, जो आपात स्थिति में कुछ समय तक देश की जरूरतें पूरी कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अगर इस मार्ग में किसी तरह की बाधा आती है तो वैश्विक तेल बाजार और कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। इसी खतरे को देखते हुए भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा नीति में विविधता और वैकल्पिक स्रोतों पर खास ध्यान देना शुरू किया है।
सरकार का कहना है कि फिलहाल देश में तेल की सप्लाई सामान्य है और घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत वैकल्पिक कदम उठाए जा सकें।

