AI और सैटेलाइट की मदद से आयकर विभाग ने पकड़ी 7000 करोड़ रुपये की कर चोरी, 900 लोगों को भेजा नोटिस
खुशबू खातून
नई दिल्ली: देश में कर चोरी पर लगाम लगाने के लिए आयकर विभाग ने अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है। हाल ही में विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सैटेलाइट डेटा की मदद से करीब 7000 करोड़ रुपये की कर चोरी का बड़ा खुलासा किया है। इस मामले में अब तक करीब 900 लोगों को नोटिस जारी किया गया है और उनसे अपनी आय और संपत्ति का पूरा ब्यौरा देने को कहा गया है।
आयकर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कई लोग अपनी वास्तविक आय और संपत्ति को छिपाकर टैक्स से बचने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन नई तकनीक की मदद से अब ऐसे मामलों का आसानी से पता लगाया जा रहा है। विभाग ने सैटेलाइट इमेजरी और AI आधारित डेटा एनालिसिस का उपयोग कर देश के कई शहरों में मौजूद बड़ी संपत्तियों, आलीशान घरों और जमीनों का विश्लेषण किया।
जांच के दौरान पाया गया कि कई लोगों ने महंगी संपत्तियां और जमीन तो खरीद ली, लेकिन अपने आयकर रिटर्न में इनका सही उल्लेख नहीं किया। सैटेलाइट तस्वीरों और सरकारी रिकॉर्ड के मिलान से यह सामने आया कि कुछ लोगों की घोषित आय उनकी वास्तविक संपत्ति से काफी कम है। इसके बाद ऐसे संदिग्ध मामलों की पहचान कर करीब 900 करदाताओं को नोटिस भेजा गया।
अधिकारियों का कहना है कि AI तकनीक की मदद से बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण करना आसान हो गया है। बैंक ट्रांजैक्शन, प्रॉपर्टी रिकॉर्ड, जीएसटी डेटा और सैटेलाइट इमेज को एक साथ मिलाकर जांच की गई, जिससे कर चोरी के कई मामले सामने आए।
आयकर विभाग ने साफ किया है कि जिन लोगों को नोटिस भेजा गया है, उन्हें अपनी आय और संपत्ति से संबंधित सही जानकारी देने का मौका दिया जाएगा। अगर जांच में कर चोरी साबित होती है, तो संबंधित लोगों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से भविष्य में कर चोरी के मामलों पर और कड़ी नजर रखी जा सकेगी। सरकार का उद्देश्य है कि हर व्यक्ति ईमानदारी से टैक्स भरे और देश के विकास में योगदान दे।
Khushboo Khatoon

