सीमांचल पर बढ़ी चर्चा: क्या बिहार-बंगाल के सीमावर्ती इलाकों के लिए बनेगा नया प्रशासनिक ढांचा?

बिहार के सीमांचल क्षेत्र को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक ढांचे पर नई चर्चा शुरू हो गई है। नेपाल, बांग्लादेश और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब होने के कारण यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया दौरे के बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि सीमांचल और पश्चिम बंगाल के कुछ सीमावर्ती जिलों को मिलाकर भविष्य में कोई नया प्रशासनिक ढांचा या केंद्र शासित प्रदेश बनाया जा सकता है।

सीमांचल पर बढ़ी चर्चा: क्या बिहार-बंगाल के सीमावर्ती इलाकों के लिए बनेगा नया प्रशासनिक ढांचा?

पटना। बिहार का सीमांचल क्षेत्र इन दिनों केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है। नेपाल और बांग्लादेश की सीमाओं के करीब स्थित यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। साथ ही यह क्षेत्र सिलीगुड़ी कॉरिडोर के भी नजदीक है, जिसे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली लाइफलाइन माना जाता है।

हाल के दिनों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सीमांचल क्षेत्र के दौरे और सुरक्षा एजेंसियों की लगातार बैठकों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भविष्य में सीमांचल और पश्चिम बंगाल के कुछ सीमावर्ती जिलों को मिलाकर कोई नया प्रशासनिक ढांचा बनाया जा सकता है।

सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक यह इलाका लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए संवेदनशील रहा है। सीमा पार घुसपैठ, मानव तस्करी, ड्रग्स की तस्करी और बदलते भू-राजनीतिक हालात के कारण इस क्षेत्र पर विशेष नजर रखी जाती रही है।

दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 25 से 27 फरवरी के बीच सीमांचल के किशनगंज, अररिया और पूर्णिया जिलों के तीन दिवसीय दौरे पर थे। उनके इस दौरे के बाद सीमांचल को लेकर राजनीतिक और रणनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं। अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या बिहार के सीमांचल और पश्चिम बंगाल के कुछ सीमावर्ती इलाकों को मिलाकर भविष्य में एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने पर विचार किया जा सकता है।

इसी संभावना को लेकर फिलहाल राजनीतिक गलियारों और सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच बहस तेज होती दिखाई दे रही है।