मुंगेर में सनसनीखेज फैसला: पूर्व CRPF जवान पिता को अपनी नाबालिग बेटियों के यौन शोषण के लिए उम्रकैद

मुंगेर की विशेष पोक्सो अदालत ने नाबालिग बेटियों के साथ यौन शोषण के दोषी पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वर्ष 2022 के इस मामले में आरोपी के खिलाफ उसकी पत्नी ने जमालपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। अदालत ने दोषी पर 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है और जुर्माना नहीं चुकाने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान रखा है।

मुंगेर में सनसनीखेज फैसला: पूर्व CRPF जवान पिता को अपनी नाबालिग बेटियों के यौन शोषण के लिए उम्रकैद

मुंगेर, 10 मार्च 2026: बिहार के मुंगेर जिले में एक बेहद चौंकाने वाले मामले में विशेष पोक्सो अदालत ने एक पिता को अपनी ही नाबालिग बेटियों के साथ बार-बार यौन शोषण करने के दोष में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषी, जो पूर्व सीआरपीएफ जवान बताया जा रहा है, पर 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न चुकाने पर उसे अतिरिक्त तीन महीने की सजा काटनी होगी।

यह मामला वर्ष 2022 का है, जब पीड़िताओं की मां ने जमालपुर थाने में अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी अपनी नाबालिग बेटियों को होटल लेकर जाता था और वहां उनका यौन शोषण करता था। आरोपी को जमालपुर के एक होटल से गिरफ्तार किया गया था।

मुंगेर न्याय मंडल के विशेष न्यायाधीश (पोक्सो एक्ट) प्रदीप कुमार चौधरी की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी की। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक (पोक्सो) प्रीतम कुमार वैश्य ने 11 गवाह पेश किए, जिनकी गवाही ने आरोपों को पूरी तरह साबित किया। सभी साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर अदालत ने 24 फरवरी 2026 को आरोपी को दोषी घोषित किया था। सोमवार को सजा सुनाते हुए अदालत ने भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के साथ पोक्सो एक्ट के प्रावधानों के तहत यह कठोर सजा सुनाई।

यह फैसला उन परिवारों के लिए एक बड़ा संदेश है जहां बच्चे घर के भीतर ही असुरक्षित होते हैं। अदालत ने इस जघन्य अपराध को रिश्तों की मर्यादा तोड़ने वाला बताते हुए सख्त टिप्पणी की। मां द्वारा ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से मामले की गंभीरता और सामने आई, जिसके बाद न्याय की प्रक्रिया तेजी से चली।

पीड़ित परिवार को न्याय मिलने पर स्थानीय लोगों ने अदालत के इस फैसले का स्वागत किया है। पोक्सो एक्ट के तहत ऐसे मामलों में तेज सुनवाई और कड़ी सजा पर जोर दिया जा रहा है, ताकि समाज में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।