ईरान से मिसाइल दागे जाने का दावा, सऊदी की उत्पादन कटौती से तेल बाजार में उथल-पुथल
सालेहा वसीम
तुर्की ने बताया कि तुर्की की सीमा की ओर ईरान से बैलिस्टिक मिसाइल दागी गई, जिसे NATO की वायु रक्षा प्रणाली ने अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में ही नष्ट कर दिया। यह मिसाइल घटना “एक बार फिर” क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ाने वाली मानी जा रही है।मिसाइल घटना 4 मार्च को हुई थी और नाटो ने इसे रोक दिया। कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
विश्लेषकों के अनुसार यह घटना आगे के तनाव और अनिश्चय का संकेत है, क्योंकि मिसाइल ने इराक और सीरिया के ऊपर से उड़ान भरी और पूर्वी भूमध्य सागर में इंटरसेप्ट हुई।
तुर्की ने चेतावनी दी है कि भविष्य में कोई भी धमकी उसकी सीमाओं पर स्वीकार्य नहीं होगी, जबकि NATO के साथ बातचीत जारी है।
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच सऊदी ने अपने दो प्रमुख तेल क्षेत्रों से तेल उत्पादन को कम करना शुरू कर दिया है, इसका कारण ऊर्जा यात्रा की बाधा और युद्ध के कारण लगने वाला जोखिम बताया जा रहा है।
इस कदम का असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर हो रहा है और कीमतें बढ़ रही हैं। इस तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड तेल के दाम लगभग $119 प्रति बैरल तक पहुंच गए, जो पिछले करीब चार वर्षों में एक उच्च स्तर है। विशेषज्ञ इस उछाल को आपूर्ति के डर और युद्ध के प्रभाव का परिणाम बताते हैं।
तेल बाजार में यह तेजी अंतरराष्ट्रीय बाजार की चिंताओं और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सप्लाई रूट पर खतरे के कारण आई है। यह मार्ग दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, और संघर्ष से यह मार्ग बाधित हो रहा ह
वर्तमान में चल रहा संघर्ष संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के ईरान पर जारी ठिकानों और बुनियादी ढांचे पर हमलों से बढ़ा है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता और भड़की है और रूस व अन्य देश भी ऊर्जा बाज़ार में स्थिरता की कमी का लाभ उठा सकते हैं।इससे होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से तेल और LNG की आवाजाही पर भी गंभीर असर दिख रहा है।
तेल के दामों में उछाल के साथ ही अन्य प्रभाव भी देखे जा रहे हैं:विश्व बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैकुछ देशों ने तेल उत्पादन कम किया या ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित किया है, जैसे कुवैत ने उत्पादन घटाया है।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर युद्ध जारी रहता है तो तेल आपूर्ति में और बाधाएँ आ सकती हैं, जिससे ऊर्जा की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं और बाजार अस्थिरता बढ़ सकती है
विश्लेषण यह भी संकेत देते हैं कि यह संकट सिर्फ तेल की आपूर्ति तक सीमित नहीं है। यदि संघर्ष लंबा चलता है तो इससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई, और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी असर पड़ेगा।
Saleha Wasim

