अमेरिका-ईरान तनाव के बीच भारत ने बढ़ाया हाथ, कोच्चि में ईरानी जहाज को मिली जगह

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच भारत ने बढ़ाया हाथ, कोच्चि में ईरानी जहाज को मिली जगह

दय्यान खान

नई दिल्ली 

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान टकराव के बीच भारत के एक फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। भारत ने तकनीकी खराबी का सामना कर रहे ईरानी नौसेना के एक जहाज को केरल के कोच्चि बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति दी। इस फैसले के बाद ईरान ने भारत का आभार जताया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि यह निर्णय मानवीय दृष्टिकोण और समुद्री परंपराओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया।

भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली ने समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि कठिन परिस्थितियों में भारत सरकार और स्थानीय अधिकारियों ने जिस तरह सहयोग किया, वह दोनों देशों के मजबूत और ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर में हुई घटना के बाद ईरान अपने नौसैनिकों की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और पूरे मामले की जांच भी कर रहा है।

राजदूत के मुताबिक, ईरानी नौसेना का जहाज आईआरआईएस लवन तकनीकी और रसद संबंधी जरूरतों के कारण कोच्चि बंदरगाह पहुंचा था। भारत ने उसे बंदरगाह पर रुकने और आवश्यक सहायता देने की अनुमति दी। ईरान ने इस सहयोग के लिए भारत सरकार और यहां के अधिकारियों का धन्यवाद किया है।

इस मुद्दे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग 2026 के दौरान भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि ईरान की ओर से भारत को संदेश मिला था कि उनका एक नौसैनिक जहाज तकनीकी समस्याओं के कारण निकटतम सुरक्षित बंदरगाह पर आना चाहता है। भारत ने स्थिति को देखते हुए मानवीय आधार पर इस अनुरोध को स्वीकार किया।

जयशंकर ने कहा कि यह मामला फरवरी के आखिर में सामने आया था और 1 मार्च को भारत ने जहाज को कोच्चि में डॉक करने की अनुमति दे दी थी। इसके बाद जहाज वहां पहुंचा और उसके चालक दल के सदस्यों को जरूरी सुविधाएं दी गईं। उन्होंने कहा कि जहाज पर कई युवा कैडेट भी मौजूद थे, इसलिए भारत ने इसे इंसानियत के नजरिए से देखा।

विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बहस हो रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि हिंद महासागर क्षेत्र की रणनीतिक वास्तविकताओं को समझना जरूरी है। उनके मुताबिक इस इलाके में कई देशों की सैन्य मौजूदगी लंबे समय से है और ऐसे हालात में संतुलित और जिम्मेदार फैसले लेना जरूरी होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखाया है कि भारत अंतरराष्ट्रीय संकट के समय मानवीय मूल्यों और कूटनीतिक संतुलन को प्राथमिकता देता है, वहीं भारत और ईरान के बीच सहयोग और विश्वास भी मजबूत होता दिखाई दे रहा है।