NH-65 पर 961 हादसे: 12 लेन की तेज रफ्तार सड़क बनी जानलेवा, 134 लोगों की मौत
हैदराबाद में NH-65 के चिंतलकुंटा से पेद्दा अंबरपेट तक 12 किलोमीटर लंबे हिस्से में वर्ष 2025 के दौरान 961 सड़क हादसे दर्ज किए गए। इन दुर्घटनाओं में 134 लोगों की मौत और 816 लोग घायल हुए। सुरक्षित पैदल पारपथ की कमी और तेज रफ्तार ट्रैफिक को हादसों की बड़ी वजह माना जा रहा है।
नवीदुल हसन
रफ्तार के लिए बनी NH-65, लेकिन सुरक्षा में बड़ी कमी: 961 हादसों में 134 लोगों की मौत
हैदराबाद: हैदराबाद के पूर्वी हिस्से में बनी 12 लेन की नेशनल हाईवे-65 (NH-65) को शहर के विकास की बड़ी परियोजना माना गया था। इस सड़क को तेज रफ्तार यातायात के लिए तैयार किया गया, लेकिन अब यही मार्ग लगातार हो रहे हादसों की वजह से चिंता का कारण बन गया है।
चिंतलकुंटा से पेद्दा अंबरपेट तक लगभग 12 किलोमीटर लंबे इस हिस्से में वर्ष 2025 के दौरान कुल 961 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में 816 लोग घायल हुए और 134 लोगों की जान चली गई। यह आंकड़े बताते हैं कि सड़क की डिजाइन तेज गति के अनुकूल तो है, लेकिन आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
यह हाईवे Hyderabad के अब्दुल्लापुरमेट, हयातनगर, एलबी नगर और वनस्थलीपुरम क्षेत्रों से होकर गुजरता है। इन इलाकों में बड़ी आबादी रहती है, जिनमें से कई लोगों को रोजाना स्कूल, बाजार, अस्पताल और कार्यस्थल जाने के लिए सड़क पार करनी पड़ती है। हालांकि सुरक्षित फुटओवर ब्रिज और अंडरपास बहुत कम हैं, जिसके कारण लोग मजबूरी में सीधे सड़क पार करते हैं।
हयातनगर क्षेत्र में सबसे अधिक 304 हादसे दर्ज किए गए और 260 लोग घायल हुए। यहां 72 पैदल यात्री घायल या मृतकों में शामिल रहे। पूरे साल में शराब पीकर वाहन चलाने के केवल दो मामले दर्ज हुए, जिससे स्पष्ट होता है कि हादसों की मुख्य वजह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सुरक्षित क्रॉसिंग की कमी भी है।
वनस्थलीपुरम में 251 हादसे और 65 पैदल यात्रियों के मामले सामने आए। अब्दुल्लापुरमेट में सबसे ज्यादा 49 लोगों की मौत दर्ज की गई, जबकि एलबी नगर में 37 पैदल यात्री हादसों का शिकार हुए। चारों पुलिस क्षेत्रों में ड्रंक एंड ड्राइव के मामले बहुत कम रहे, जो यह संकेत देते हैं कि समस्या सड़क की संरचना से जुड़ी हो सकती है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पहले जहां सड़क पार करना आसान था, अब वहां कई लेन की तेज रफ्तार ट्रैफिक के बीच से गुजरना पड़ता है। सुरक्षित पारपथ दूर-दूर हैं या पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में लोग जोखिम उठाकर सड़क पार करते हैं, जिससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मार्ग एक्सप्रेसवे की तरह बनाया गया है, लेकिन यह घनी आबादी वाले इलाकों के बीच से गुजरता है। ऐसे में केवल गति पर ध्यान देने के बजाय सुरक्षा उपायों को मजबूत करना आवश्यक है।
हैदराबाद के पूर्वी हिस्से में तेजी से हो रहे विकास के बीच NH-65 अब यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या बुनियादी ढांचा विकास आम लोगों की सुरक्षा के साथ संतुलन बना पा रहा है। यदि जल्द ही डिजाइन और सुरक्षा में सुधार नहीं किया गया, तो तेज रफ्तार की यह सड़क आगे भी जानलेवा साबित हो सकती है।
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