ED कार्रवाई पर सवाल, लेकिन फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं
उफ़क साहिल
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक चल रही जांच के तहत राजनीतिक सलाहकार संस्था I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर व कार्यालय पर तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी के अनुसार, यह कार्रवाई कथित मनी-लॉन्ड्रिंग और कोयला घोटाले से जुड़े एक मामले में की गई है।
तलाशी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुँचीं, जिसके बाद यह मामला सिर्फ जांच तक सीमित न रहकर राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बन गया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग व्याख्याएँ सामने आई हैं।
ED का दावा है कि तलाशी के समय कुछ दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हटाए गए, जिससे जांच प्रभावित होने की आशंका है।
वहीं ममता बनर्जी का कहना है कि एजेंसी राजनीतिक दल से जुड़े आंतरिक और रणनीतिक डेटा को जब्त करने की कोशिश कर रही थी, जो जांच के दायरे में नहीं आता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा मामला है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि
केवल मौके पर मौजूद रहने या दस्तावेज़ ले जाने के आरोप भर से किसी की गिरफ्तारी नहीं होती।
गिरफ्तारी तभी संभव है जब यह स्पष्ट रूप से साबित हो कि जांच से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत जानबूझकर नष्ट किए गए या छुपाए गए हों।
फिलहाल यह मामला कानूनी जांच और अदालतों के अधीन है।
अब तक किसी भी गिरफ्तारी का कोई आदेश या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और आगे की कार्रवाई अदालत के निर्देशों और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
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