ईरान में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी पर आएगा भारी खर्च, सरकार के सामने बड़ी चुनौती
खुशबू खातून
नई दिल्ली।
ईरान में मौजूदा हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। ऐसे में वहां फंसे हजारों भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है। आधिकारिक आकलन के अनुसार, ईरान में इस समय करीब 10 से 12 हजार भारतीय नागरिक मौजूद हैं, जिनमें छात्र, कारोबारी, धार्मिक यात्री और कामकाजी लोग शामिल हैं।
ईरान में इंटरनेट सेवाओं पर रोक, कई इलाकों में आवाजाही पर प्रतिबंध और उड़ानों की सीमित उपलब्धता के कारण भारतीयों को वहां से निकालना आसान नहीं है। हालात को देखते हुए सरकार को चार्टर्ड फ्लाइट्स, विशेष कूटनीतिक अनुमति और वैकल्पिक मार्गों पर विचार करना पड़ रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए सरकार को कई सौ करोड़ रुपये तक का खर्च उठाना पड़ सकता है। इसमें विशेष विमान व्यवस्था, ट्रांजिट देशों के हवाई अड्डों का उपयोग, सुरक्षा इंतजाम और आपातकालीन सहायता शामिल है।
भारत सरकार ईरान स्थित भारतीय दूतावास और आसपास के मित्र देशों के साथ लगातार संपर्क में है। जरूरत पड़ने पर पड़ोसी देशों के एयरपोर्ट का इस्तेमाल कर भारतीयों को चरणबद्ध तरीके से भारत लाने की योजना बनाई जा रही है।
सरकार ने ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे दूतावास द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और घबराएं नहीं। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि सभी भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऑपरेशन भारत के अब तक के सबसे चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू अभियानों में से एक हो सकता है, लेकिन सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगी।
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