तेलंगाना में आवारा कुत्तों की सामूहिक हत्या, एक हफ्ते में 500 से ज्यादा की मौत
तेलंगाना में आवारा कुत्तों की सामूहिक हत्या का मामला सामने आने से राज्य में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि ग्राम पंचायत चुनावों के बाद आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के नाम पर सैकड़ों कुत्तों को ज़हर दिया गया। पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराया है और दोषियों की पहचान के लिए जांच जारी है। यह मामला पशु अधिकारों और कानून व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है।
नवीदुल हसन
तेलंगाना में आवारा कुत्तों की सामूहिक हत्या, एक हफ्ते में 500 से ज्यादा कुत्तों की मौत
हैदराबाद: तेलंगाना के कुछ जिलों में आवारा कुत्तों की बड़ी संख्या में हत्या का मामला सामने आया है। बीते एक हफ्ते में करीब 500 आवारा कुत्तों को ज़हर देकर मार दिया गया, जिससे पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है। यह घटना मुख्य रूप से कामारेड्डी और हनमकोंडा जिलों की बताई जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कार्रवाई कथित तौर पर हाल ही में हुए ग्राम पंचायत चुनावों के दौरान किए गए एक चुनावी वादे को पूरा करने के लिए की गई। आरोप है कि कुछ गांवों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से परेशान होकर उन्हें खत्म करने का फैसला लिया गया।
जानकारी के मुताबिक, कामारेड्डी जिले के कई गांवों—जैसे भवानिपेट, पलवनचा, फरीदपेट, वाड़ी और बंदरामेश्वरपल्ली—में बड़ी संख्या में कुत्तों को ज़हर मिला खाना खिलाया गया, जिससे उनकी मौत हो गई। पशु कल्याण कार्यकर्ता अदुलापुरम गौतम (35) ने 12 जनवरी को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो से तीन दिनों में ही करीब 200 कुत्तों की जान ले ली गई।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मृत कुत्तों के शवों को गांवों के बाहर दफना दिया गया था। बाद में पशु चिकित्सा (वेटरनरी) टीमों ने शवों को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम किया ताकि मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके। शुरुआती जांच में ज़हर दिए जाने की आशंका जताई जा रही है।
इस घटना के सामने आने के बाद पशु प्रेमियों और सामाजिक संगठनों में गुस्सा है। उनका कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान हत्या नहीं, बल्कि नसबंदी, टीकाकरण और वैज्ञानिक तरीकों से किया जाना चाहिए। कानून के तहत इस तरह की सामूहिक हत्या अपराध है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस घटना के पीछे कौन लोग शामिल हैं और किसके आदेश पर यह कदम उठाया गया। प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ा है, बल्कि मानवता और पशु अधिकारों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
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