एम्बुलेंस नहीं मिली तो ठेले पर पत्नी को अस्पताल ले गया शख्स, रास्ते में हुई मौत
खुशबू खातून
सागर (मध्य प्रदेश):
मध्य प्रदेश के सागर जिले से मानवता को झकझोर देने वाली एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां एक गरीब सब्जी विक्रेता अपनी गंभीर रूप से बीमार पत्नी को अस्पताल ले जाने के लिए घंटों तक एंबुलेंस का इंतजार करता रहा, लेकिन जब कोई सहायता नहीं मिली तो उसने मजबूरी में अपनी पत्नी को ठेले पर लादकर अस्पताल की ओर रवाना किया। दुर्भाग्यवश, अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी पत्नी की मौत हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित व्यक्ति की पत्नी काफी समय से बीमार थी और अचानक उसकी हालत बिगड़ गई। परिजनों ने कई बार एंबुलेंस सेवा को फोन किया, लेकिन समय पर कोई वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया। मजबूर होकर पति ने अपने रोजी-रोटी के साधन, सब्जी के ठेले को ही एंबुलेंस बना लिया और पत्नी को उस पर लिटाकर अस्पताल की ओर चल पड़ा।
तेज धूप और लंबी दूरी के कारण महिला की हालत और बिगड़ती चली गई। राहगीरों ने मदद करने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने से पहले ही महिला ने दम तोड़ दिया।
इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की पोल खोल कर रख दी है। जहां एक ओर सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण और गरीब तबके के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर समय पर एंबुलेंस मिल जाती, तो महिला की जान बचाई जा सकती थी। इस घटना के बाद प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर आपातकालीन सेवाएं किसके लिए हैं और जरूरत के समय गरीबों को क्यों नजरअंदाज किया जाता है।
प्रशासन की ओर से मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि एंबुलेंस उपलब्ध न होने के कारणों की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की बात भी कही जा रही है।
यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जरूरत इस बात की है कि सरकार जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करे, ताकि भविष्य में किसी को अपने प्रियजन को ठेले पर ढोने के लिए मजबूर न होना पड़े।
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