ईरान ने ट्रंप की धमकियों पर यूएन से मांगी सख्त कार्रवाई, विरोध-प्रदर्शनों के बीच बढ़ा तनाव
सबा फिरदौस
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर तेज़ होता दिख रहा है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की है कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर सख़्त रुख अपनाए। ईरान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत अमीर सईद इरावानी ने यूएन महासचिव और सुरक्षा परिषद को पत्र लिखकर ट्रंप के भड़काऊ और गैर जिम्मेदाराना बयानों की निंदा करने की मांग की है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब ईरान में महंगाई और आर्थिक हालात को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। हाल ही में ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों की मौतें जारी रहीं, तो अमेरिका कार्रवाई के लिए तैयार है। ईरान का कहना है कि इस तरह की धमकियां संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सीधा उल्लंघन हैं।
पत्र में इरावानी ने साफ कहा कि किसी देश के आंतरिक हालात या जन-आंदोलनों को बहाना बनाकर बाहरी दबाव या सैन्य हस्तक्षेप की बात करना, ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमला है। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान अपने देश की रक्षा करना जानता है और जरूरत पड़ने पर निर्णायक और संतुलित जवाब देगा।
ईरान ने अमेरिका को यह भी आगाह किया है कि इन धमकियों के कारण अगर हालात बिगड़ते हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी वॉशिंगटन की होगी।
इस बीच ईरान के कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। महंगाई, आर्थिक मंदी और गिरती जीवन-स्तर से परेशान लोग सड़कों पर उतर आए हैं। तेहरान के कई इलाकों के साथ-साथ क़ोम, मशहद और हमेदान जैसे शहरों में भी प्रदर्शन देखने को मिले हैं। अब तक हिंसा में कई लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अगर ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार हुआ, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा। इस पर ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने पलटवार करते हुए कहा कि अमेरिकी दखल पूरे क्षेत्र में अराजकता फैला सकता है और इससे अमेरिकी हितों को भी नुकसान पहुंचेगा।
ईरान इस समय सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि गंभीर आर्थिक संकट से भी जूझ रहा है। मुद्रा का लगातार गिरना, बढ़ती महंगाई और लंबे समय से चल रहा सूखा हालात को और मुश्किल बना रहा है, खासकर करीब एक करोड़ की आबादी वाले तेहरान में।
इस बार ईरानी नेतृत्व का रुख पहले के मुकाबले नरम दिख रहा है। राष्ट्रपति मसूद पेशेज़कियान ने हालात के लिए सरकार की जिम्मेदारी मानी है और समाधान का भरोसा दिलाया है। वहीं ईरान-अमेरिका रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण हैं जून में अमेरिकी हमले और हालिया ट्रंप की चेतावनियों के बाद हालात और गरमा गए हैं। ईरान ने साफ कहा है कि किसी भी आक्रामक कार्रवाई का जवाब सख्ती से दिया जाएगा, जिससे पश्चिम एशिया की राजनीति में तनाव बढ़ गया है।
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