यमन से यूएई की सैन्य वापसी का ऐलान, सऊदी हमले और अलगाववादियों के समर्थन के आरोपों के बीच बढ़ा तनाव
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने यमन से अपनी शेष सैन्य टुकड़ियों को वापस बुलाने का ऐलान किया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सऊदी अरब ने अबू धाबी पर यमन के दक्षिणी अलगाववादी गुटों को समर्थन देने का आरोप लगाया और मुकल्ला बंदरगाह पर कथित यूएई-समर्थित हथियारों की खेप पर हवाई हमला किया। इस घटनाक्रम ने सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के भीतर गहराते मतभेदों को उजागर कर दिया है।
नवीदुल हसन
यमन से यूएई की सैन्य वापसी का ऐलान, सऊदी हमले और अलगाववादियों के समर्थन के आरोपों के बीच बढ़ा तनाव
यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष के बीच यूएई ने मंगलवार को घोषणा की कि वह वहां चल रहे अपने “आतंकवाद-रोधी” अभियानों को समाप्त करते हुए अपने शेष सैन्य कर्मियों को वापस बुला रहा है। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हालिया घटनाक्रमों और सुरक्षा जोखिमों का व्यापक आकलन करने के बाद यह निर्णय लिया गया है, ताकि उसके सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
यूएई की यह घोषणा ऐसे समय पर आई है जब यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने 24 घंटे के भीतर यूएई से अपने सैनिकों को वापस बुलाने की मांग की थी। इस मांग को सऊदी अरब का समर्थन भी मिला। इससे पहले सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के दक्षिणी बंदरगाह शहर मुकल्ला पर हवाई हमला किया था। रियाद का दावा है कि यह हमला यूएई से जुड़े हथियारों की एक खेप पर किया गया, जो यमन के अलगाववादी संगठन सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) के लिए भेजी जा रही थी।
एसटीसी पहले यमन की सरकार के साथ मिलकर हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ रहा था, लेकिन हाल के महीनों में उसने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। संगठन दक्षिणी यमन में एक स्वतंत्र राज्य की मांग कर रहा है और उसने हद्रामौत और महरा जैसे महत्वपूर्ण प्रांतों में अपना नियंत्रण बढ़ा लिया है। ये दोनों इलाके सऊदी अरब की सीमाओं के करीब हैं, जिससे रियाद की सुरक्षा चिंताएं और गहरी हो गई हैं।
सऊदी अरब ने यूएई पर आरोप लगाया कि उसने एसटीसी पर दबाव डालकर उसे सैन्य कार्रवाई के लिए उकसाया। सऊदी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किसी भी तरह का खतरा “रेड लाइन” है और ऐसे खतरों से निपटने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इस बयान से दोनों खाड़ी देशों के बीच तनाव खुलकर सामने आ गया।
मुकल्ला पर हुए हमले के बाद यमन के राष्ट्रपति परिषद के प्रमुख रशाद अल-अलीमी ने यूएई के साथ रक्षा समझौता रद्द कर दिया और अमीराती बलों को 24 घंटे में देश छोड़ने का आदेश दिया। यमनी सरकारी मीडिया के मुताबिक, अल-अलीमी ने कहा कि यह “पुष्ट रूप से साबित हो चुका है” कि यूएई ने एसटीसी को सरकार के खिलाफ विद्रोह के लिए निर्देशित किया।
हालांकि यूएई ने इन आरोपों को खारिज किया है। अबू धाबी का कहना है कि जिस खेप पर हमला हुआ, उसमें हथियार नहीं थे और वह यूएई के अपने बलों के लिए थी, न कि एसटीसी के लिए। यूएई ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सऊदी अरब की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है और तनाव को बढ़ने से रोकने के लिए समाधान चाहता है।
इस पूरे घटनाक्रम पर क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कतर के विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब और यूएई के बयानों का स्वागत करते हुए कहा कि यह क्षेत्रीय स्थिरता, पड़ोसी देशों के अच्छे संबंधों और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जीसीसी में सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान शामिल हैं।
वहीं, सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो और पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री इशाक डार से फोन पर बातचीत कर क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। इससे संकेत मिलता है कि यमन संकट और खाड़ी देशों के बीच बढ़ते तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ रही है।
दूसरी ओर, एसटीसी अपने रुख पर कायम है। संगठन के प्रवक्ता अनवर अल-तमीमी ने कहा कि वे अपने कब्जे वाले इलाकों से पीछे हटने के बारे में नहीं सोच रहे हैं। उनके अनुसार, “अपनी ही जमीन से हटने को कहना तर्कसंगत नहीं है। हम रक्षात्मक स्थिति में हैं और किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा।”
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