‘तिलक नहीं तो टोपी भी नहीं’, AMU में मंदिर निर्माण की मांग पर देवकीनंदन ठाकुर का बयान
खुशबू खातून
अलीगढ़।
प्रसिद्ध कथावाचक और संत देवकीनंदन ठाकुर ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) को लेकर एक बड़ा बयान दिया है, जो सियासी और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि यदि एएमयू परिसर में धार्मिक पहचान से जुड़े प्रतीकों पर रोक लगाई जाती है, तो यह सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर तिलक लगाने की अनुमति नहीं है, तो टोपी पहनने की भी अनुमति नहीं होनी चाहिए।”
देवकीनंदन ठाकुर ने इसके साथ ही एएमयू परिसर में मंदिर निर्माण की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले और कार्यरत हिंदू समुदाय के लोगों को भी अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार पूजा-पाठ करने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि एएमयू देश का केंद्रीय विश्वविद्यालय है, ऐसे में वहां सभी धर्मों के लोगों को समान अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि देश का संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है और किसी एक समुदाय के प्रतीकों को अनुमति देना, जबकि दूसरे समुदाय के प्रतीकों पर रोक लगाना, समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। देवकीनंदन ठाकुर ने यह भी कहा कि शिक्षा के संस्थानों में भेदभाव नहीं होना चाहिए और सभी को अपनी पहचान के साथ रहने का अधिकार मिलना चाहिए।
इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कुछ संगठनों ने उनके बयान का समर्थन किया है, जबकि कुछ लोगों ने इसे विवादास्पद बताते हुए आलोचना की है। एएमयू प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी एएमयू में धार्मिक प्रतीकों और गतिविधियों को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। देवकीनंदन ठाकुर के इस बयान के बाद एक बार फिर यह मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक और सामाजिक बहस और तेज होने की संभावना है।
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