ट्रेन की देरी बनी छात्रा के भविष्य पर भारी, रेलवे पर 9 लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना
खुशबू खातून
बस्ती (उत्तर प्रदेश):
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में उपभोक्ता अदालत ने भारतीय रेलवे पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 9 लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना उस मामले में लगाया गया है, जहां ट्रेन के अत्यधिक विलंब के कारण एक छात्रा का नीट (NEET) परीक्षा छूट गई थी और उसका भविष्य अधर में लटक गया।
जानकारी के अनुसार, यह मामला वर्ष 2018 का है। पीड़ित छात्रा ने नीट परीक्षा देने के लिए समय से टिकट बुक कराया था और निर्धारित ट्रेन से यात्रा कर रही थी। हालांकि, ट्रेन अपने निर्धारित समय से करीब दो घंटे से अधिक विलंब से पहुंची, जिसके चलते छात्रा परीक्षा केंद्र पर समय पर नहीं पहुंच सकी और उसका नीट परीक्षा में शामिल होना संभव नहीं हो पाया।
छात्रा ने इस घटना को लेकर उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया कि उसने कई वर्षों तक कड़ी मेहनत कर परीक्षा की तैयारी की थी, लेकिन रेलवे की लापरवाही के कारण उसका भविष्य प्रभावित हुआ। इस देरी से न केवल उसका एक साल बर्बाद हुआ, बल्कि मानसिक तनाव और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।
मामले की सुनवाई के बाद उपभोक्ता अदालत ने रेलवे को सेवा में गंभीर लापरवाही का दोषी माना। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि रेलवे जैसी सार्वजनिक सेवा संस्था की जिम्मेदारी है कि यात्रियों को समय पर गंतव्य तक पहुंचाए, खासकर जब मामला किसी महत्वपूर्ण परीक्षा से जुड़ा हो।
अदालत ने रेलवे को आदेश दिया कि वह पीड़ित छात्रा को 9 लाख 10 हजार रुपये का मुआवजा अदा करे। यह राशि मानसिक पीड़ा, भविष्य को हुए नुकसान और अन्य खर्चों की भरपाई के लिए तय की गई है।
इस फैसले को यात्रियों के अधिकारों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय रेलवे प्रशासन के लिए चेतावनी है कि वह समय पालन और यात्रियों की सुविधाओं को लेकर अधिक गंभीरता बरते।
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि सार्वजनिक परिवहन में लापरवाही किसी छात्र के करियर को प्रभावित करे, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उपभोक्ता अदालत का यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मिसाल बन सकता है।
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