ईडी बनाम ममता बनर्जी: सुप्रीम कोर्ट ने ईडी अधिकारियों पर दर्ज बंगाल पुलिस की एफआईआर पर रोक लगाई
प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। यह मामला कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में आई-पैक कार्यालय पर ईडी की छापेमारी के दौरान कथित हस्तक्षेप से जुड़ा है। कोर्ट ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज तीन एफआईआर पर रोक लगाते हुए कहा कि यदि ऐसे मामलों का समाधान नहीं हुआ तो राज्यों में कानूनहीनता की स्थिति पैदा हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट इस बात की जांच करेगा कि क्या राज्य एजेंसियों ने केंद्रीय जांच में अनुचित दखल दिया।
नवीदुल हसन
ईडी बनाम ममता बनर्जी: सुप्रीम कोर्ट ने ईडी अधिकारियों पर दर्ज बंगाल पुलिस की एफआईआर पर रोक लगाई
नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुनवाई करते हुए पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई तीन एफआईआर पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र की जांच एजेंसियों के काम में राज्य एजेंसियों का दखल एक गंभीर मुद्दा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यह मामला उस घटना से जुड़ा है, जब ईडी ने कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में कोलकाता स्थित राजनीतिक सलाहकार संस्था आई-पैक (I-PAC) के कार्यालय पर छापा मारा था। ईडी का आरोप है कि इस छापे के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा और जांच में बाधा डाली।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि अगर इस तरह के मामलों का समाधान नहीं किया गया, तो राज्यों में कानून व्यवस्था बिगड़ने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। कोर्ट ने कहा कि हर संस्था को स्वतंत्र रूप से काम करने देना जरूरी है और जांच एजेंसियों को राजनीतिक दबाव से मुक्त रहना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनावी काम में किसी केंद्रीय एजेंसी को दखल नहीं देना चाहिए, लेकिन अगर कोई एजेंसी ईमानदारी से किसी गंभीर अपराध की जांच कर रही है, तो उसे रोका भी नहीं जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में:
पश्चिम बंगाल सरकार
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
डीजीपी राजीव कुमार
कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार वर्मा
दक्षिण कोलकाता के डीसी प्रियव्रत रॉय
को नोटिस जारी किया है और दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई 3 फरवरी को होगी।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि यह कोई पहली बार नहीं है जब पश्चिम बंगाल में केंद्रीय एजेंसियों को रोका गया हो। उन्होंने आरोप लगाया कि:
ईडी अधिकारियों को डराया गया
जरूरी फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले जाए गए
पुलिस ने सहयोग करने के बजाय रुकावट डाली
ईडी का कहना है कि कानून के तहत पुलिस को ईडी की मदद करनी चाहिए थी, लेकिन यहां उल्टा हुआ।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई योग्य नहीं है और इसे हाईकोर्ट में सुना जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि:
आई-पैक तृणमूल कांग्रेस की चुनावी सलाहकार संस्था है
वहां पार्टी का गोपनीय डेटा मौजूद था
चुनाव के बीच इस तरह की छापेमारी गलत नीयत से की गई
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने केवल पार्टी से जुड़ी जानकारी वाला लैपटॉप और मोबाइल लिया था, कोई सबूत नहीं।
राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भी याचिका की वैधता पर सवाल उठाया और कहा कि ईडी ने एक ही मामले में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों जगह याचिका दायर की है।
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