इंडिगो संकट: DGCA की रिपोर्ट के बाद एयरलाइन पर सख्त कार्रवाई के संकेत
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो दिसंबर 2025 में उड़ान रद्द होने और देरी के कारण गंभीर संकट में घिर गई। DGCA की जांच में सामने आया कि एयरलाइन ने फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को सही ढंग से लागू नहीं किया। 27 दिसंबर 2025 को DGCA ने अपनी रिपोर्ट सिविल एविएशन मंत्रालय को सौंप दी, जिसके बाद इंडिगो पर जुर्माना, उड़ान कटौती और अधिकारियों पर कार्रवाई जैसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता बताते हुए सख्त रुख अपनाया है।
नवीदुल हसन
इंडिगो संकट: DGCA की रिपोर्ट के बाद एयरलाइन पर सख्त कार्रवाई की तैयारी
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही है। दिसंबर 2025 में बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने और लगातार देरी के कारण लाखों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने जांच की और अब अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार, इस रिपोर्ट के आधार पर इंडिगो के खिलाफ “मिसाल कायम करने वाली” सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
DGCA की जांच में सामने आया है कि इंडिगो नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को सही तरीके से लागू करने में असफल रही। इन नियमों का उद्देश्य पायलटों और क्रू मेंबर्स को पर्याप्त आराम देना है, ताकि उड़ानों की सुरक्षा बनी रहे। हालांकि, एयरलाइन को इन नियमों को लागू करने के लिए पहले से समय दिया गया था, लेकिन इंडिगो ने पायलटों और कर्मचारियों की सही योजना नहीं बनाई। इसका नतीजा यह हुआ कि दिसंबर के पहले और दूसरे सप्ताह में सैकड़ों उड़ानें अचानक रद्द करनी पड़ीं।
23 दिसंबर 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट के एक अन्य आदेश के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया, जब इंडिगो के संचालन पर सवाल उठने लगे। इसके बाद DGCA ने अपनी जांच तेज की और 27 दिसंबर 2025 को रिपोर्ट सिविल एविएशन मंत्रालय को सौंप दी। सरकार का कहना है कि इतनी बड़ी एयरलाइन की लापरवाही से पूरे विमानन क्षेत्र पर असर पड़ता है, इसलिए इस पर कड़ा कदम जरूरी है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इंडिगो की घरेलू विमानन बाजार में लगभग 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी है। ऐसे में जब इंडिगो की उड़ानें रद्द होती हैं, तो इसका सीधा असर आम यात्रियों पर पड़ता है। कई यात्रियों की परीक्षाएं, शादियां और जरूरी यात्राएं प्रभावित हुईं। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इंडिगो के खिलाफ नाराजगी जताई।
इस संकट के बाद सरकार ने इंडिगो के शीतकालीन उड़ान कार्यक्रम (विंटर शेड्यूल) में लगभग 5 प्रतिशत की कटौती कर दी है। कुछ मार्गों पर उड़ानों की संख्या कम की गई है और यात्रियों को दूसरी एयरलाइनों में शिफ्ट करने की व्यवस्था की जा रही है। DGCA ने इंडिगो को निर्देश दिया है कि वह रद्द हुई उड़ानों का पूरा रिफंड दे और यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराए।
सूत्रों का कहना है कि DGCA की रिपोर्ट में एयरलाइन प्रबंधन की गंभीर लापरवाही की बात कही गई है। इसी कारण इंडिगो पर भारी जुर्माना, अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई या भविष्य की उड़ानों पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। नागरिक उड्डयन मंत्री ने भी साफ कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
फिलहाल, इंडिगो के वरिष्ठ अधिकारी DGCA के सामने लगातार पेश हो रहे हैं और अपनी सफाई दे रहे हैं। अब सबकी नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी है। यह मामला न सिर्फ इंडिगो, बल्कि पूरे भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए एक अहम सबक माना जा रहा है, ताकि भविष्य में यात्रियों को इस तरह की परेशानी न झेलनी पड़े।
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