मधुबनी मॉब लिंचिंग मामला: SIO ने पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए, दाढ़ी देखकर मजदूर पर जानलेवा हमला
मधुबनी | 2 जनवरी 2026
बिहार के मधुबनी ज़िले के राजनगर थाना क्षेत्र के नंदी चकदा गांव में सुपौल निवासी नूरसेद आलम के साथ हुई बर्बर भीड़ हिंसा ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना को लेकर स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन (SIO) बिहार ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए इसे मॉब लिंचिंग का प्रयास बताया है।
29 दिसंबर की रात कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा नूरसेद आलम के कमरे में घुसकर दाढ़ी देखकर उन्हें “बांग्लादेशी” और “पाकिस्तानी” कहने, जबरन नारे लगवाने और वीडियो बनाने का आरोप है। अगले दिन दोपहर करीब एक बजे बाइक और गाड़ियों से पहुँची लगभग 50 लोगों की भीड़ ने उन पर जानलेवा हमला किया, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
SIO और बिहार यूथ ऑर्गेनाइजेशन (BYO) ने आरोप लगाया है कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होना पुलिस की निष्क्रियता और कानून-व्यवस्था के कमजोर होने का संकेत है। संगठन का कहना है कि जब भीड़ कानून अपने हाथ में लेती है और पुलिस मूकदर्शक बनी रहती है, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक स्थिति पैदा करता है।
SIO बिहार के प्रदेश अध्यक्ष दनियाल अकरम ने कहा कि यह हमला केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि संविधान, इंसाफ़ और इंसानियत पर हमला है। उन्होंने मांग की कि भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर सभी दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित को सुरक्षा, बेहतर इलाज व मुआवज़ा दिया जाए।
संगठनों ने राज्य सरकार से सुप्रीम कोर्ट के मॉब लिंचिंग संबंधी निर्देशों को तुरंत लागू करने की भी मांग की है और चेतावनी दी है कि पीड़ित को न्याय न मिलने तक लोकतांत्रिक तरीकों से संघर्ष जारी रहेगा।
रेहान फ़ज़ल
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