Headline: इतिहास का काला दिन: 5 जनवरी 1998 को हरदोई के पास दो यात्री ट्रेनों की भीषण टक्कर, 60 लोगों की मौत
खुशबू खातून
हरदोई (उत्तर प्रदेश):
भारतीय रेलवे के इतिहास में 5 जनवरी 1998 का दिन एक दर्दनाक हादसे के रूप में दर्ज है। इसी दिन उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के पास एक भीषण रेल दुर्घटना हुई, जिसमें बरेली–वाराणसी पैसेंजर ट्रेन और काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस आमने-सामने टकरा गईं। इस भयावह हादसे में करीब 60 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कई डिब्बे एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। कई यात्री डिब्बों में फंस गए थे, जिन्हें निकालने के लिए राहत एवं बचाव दल को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। स्थानीय लोग भी तुरंत मदद के लिए आगे आए और घायलों को नजदीकी अस्पतालों तक पहुंचाया।
राहत और बचाव अभियान:
दुर्घटना की सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन, पुलिस, एंबुलेंस और आपदा राहत दल मौके पर पहुंच गए। कटिंग मशीनों की मदद से डिब्बों को काटकर फंसे यात्रियों को बाहर निकाला गया। घायलों को हरदोई, लखनऊ समेत आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
हादसे की वजह:
प्रारंभिक जांच में हादसे के पीछे सिग्नलिंग प्रणाली में चूक और मानवीय त्रुटि की आशंका जताई गई। रेलवे ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए थे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
देशभर में शोक की लहर:
इस हादसे के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की गई, वहीं घायलों के समुचित इलाज के निर्देश दिए गए।
सबक और सुधार:
यह दुर्घटना भारतीय रेलवे के लिए एक कड़ा सबक साबित हुई। इसके बाद रेलवे सुरक्षा मानकों को और सख्त किया गया, सिग्नलिंग सिस्टम में सुधार किए गए और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया।
आज भी याद है वह मंजर:
5 जनवरी 1998 की यह रेल दुर्घटना आज भी लोगों के दिलों में एक गहरी टीस छोड़ जाती है। यह हादसा हमें यह याद दिलाता है कि रेल सुरक्षा में छोटी-सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है, इसलिए सतर्कता और तकनीकी मजबूती बेहद जरूरी है।
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