सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की, जस्टिस यशवंत वर्मा को राहत नहीं
उफ़क साहिल
कैश रिकवरी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने लोकसभा स्पीकर के फैसले में दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस वर्मा की तरफ से कहा गया कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई में कई खामियां हैं। उन्होंने यह सवाल उठाया कि घटनास्थल पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया और जांच पूरी तरह पारदर्शी नहीं रही। याचिका में यह भी कहा गया कि इन पहलुओं की निष्पक्ष जांच के बिना स्पीकर का फैसला सही नहीं माना जा सकता।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट इन दलीलों से सहमत नहीं हुआ। अदालत ने स्पष्ट किया कि लोकसभा स्पीकर ने यह फैसला अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत लिया है और ऐसे मामलों में अदालत को सीमित दायरे में ही हस्तक्षेप करना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि संसद की कार्यप्रणाली में संतुलन बनाए रखना लोकतंत्र के लिए जरूरी है।
इस फैसले के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा को कानूनी स्तर पर बड़ा झटका लगा है। साथ ही यह फैसला संसद और न्यायपालिका के अधिकारों की सीमा को भी साफ करता है। जानकारों का कहना है कि आगे भी जब किसी संसदीय फैसले को अदालत में चुनौती दी जाएगी, तो यह निर्णय एक अहम मिसाल के रूप में देखा जाएगा।
फिलहाल इस मामले को लेकर राजनीतिक और संवैधानिक चर्चाएं तेज हो गई हैं और आने वाले समय में इसके असर पर नजर बनी है
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