भारत-अमेरिका व्यापार तनाव के बीच AI बना नया मुद्दा”
उफ़क साहिल
अमेरिका में व्यापार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने कहा है कि कई बड़े AI प्लेटफॉर्म अमेरिका में बने डेटा सेंटर्स, बिजली और तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उनका फायदा भारत जैसे देशों को क्यों मिल रहा है।
नवारो ने ChatGPT जैसे प्लेटफॉर्म का उदाहरण देते हुए कहा कि ये सेवाएं पूरी तरह अमेरिकी इंफ्रास्ट्रक्चर पर चलती हैं, फिर भी इनसे कमाई और लाभ विदेशी यूज़र्स और कंपनियों तक पहुंच रहा है। उनका मानना है कि इससे अमेरिकी करदाताओं और संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है। तकनीकी सेवाओं, डिजिटल टैक्स और टैरिफ को लेकर दोनों देशों में मतभेद बने हुए हैं। ट्रंप समर्थक समूह का कहना है कि अमेरिका को अपनी तकनीक से होने वाले फायदे पहले अपने देश में ही रखने चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बयान से AI और तकनीक को लेकर राष्ट्रवाद की बहस तेज़ हो सकती है। अगर अमेरिका AI सेवाओं पर सख़्त नियम या टैक्स लगाता है, तो इसका असर भारत की IT और AI इंडस्ट्री पर पड़ सकता है। आने वाले समय में AI कारोबार पर राजनीति और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों का प्रभाव बढ़ने की संभावना है।
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