उन्नाव रेप केस: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को जमानत देने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस में दोषी पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ी राहत देने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिसंबर 2025 में सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित करते हुए उन्हें जमानत दी थी, जिसे CBI ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। CBI ने कोर्ट को बताया कि यह मामला नाबालिग से दुष्कर्म से जुड़ा है और घटना के समय पीड़िता की उम्र 15 वर्ष 10 महीने थी। सेंगर को आईपीसी की धारा 376 और पॉक्सो एक्ट की धारा 5 व 6 के तहत दोषी ठहराया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हालांकि आमतौर पर जमानत वापस नहीं ली जाती, लेकिन इस मामले की परिस्थितियां अलग हैं। इसके अलावा, कुलदीप सेंगर पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत से जुड़े एक अन्य मामले में भी 10 साल की सजा काट रहे हैं। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जनवरी 2026 में अगली सुनवाई करेगा और तब तक सेंगर न्यायिक हिरासत में रहेंगे।

Dec 29, 2025 - 16:20
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उन्नाव रेप केस: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को जमानत देने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

नवीदुल हसन

उन्नाव रेप केस: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को जमानत देने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उन्नाव रेप केस में दोषी पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत देने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। अदालत के इस आदेश के बाद सेंगर जेल में ही रहेंगे।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह की पीठ ने पारित किया। पीठ ने सेंगर को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में तय की।

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिसंबर 2025 में कुलदीप सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित करते हुए उन्हें जमानत दी थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सेंगर अब तक सात वर्ष पांच महीने की सजा काट चुके हैं और उनकी अपील लंबित है।

दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। CBI की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि यह मामला नाबालिग से दुष्कर्म से जुड़ा है और आरोपी को आईपीसी की धारा 376 तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 5 और 6 के तहत दोषी ठहराया गया है।

CBI ने कोर्ट को यह भी बताया कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 15 वर्ष 10 महीने थी और ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ दायर अपील अभी लंबित है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सामान्य परिस्थितियों में अदालत किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता वापस नहीं लेती, लेकिन इस मामले में स्थिति अलग है, क्योंकि आरोपी एक अन्य मामले में पहले से ही जेल में बंद है। इसके बाद पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर रोक लगा दी।

हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद कुलदीप सेंगर की रिहाई संभव नहीं थी। वे एक अन्य CBI मामले में भी सजा काट रहे हैं, जो उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत से जुड़ा है। उस मामले में सेंगर को 10 वर्ष की सजा सुनाई गई है और उनकी अपील भी अदालत में लंबित है।

उन्नाव रेप केस वर्ष 2017 में दर्ज किया गया था। मामले की जांच बाद में CBI को सौंपी गई थी। वर्ष 2019 में अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे की सुनवाई जनवरी 2026 में करेगा। तब तक कुलदीप सिंह सेंगर न्यायिक हिरासत में बने रहेंगे।

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