23 December, किसान दिवस: सम्मान, संघर्ष और उम्मीद।

खेतों से निकलकर जो अनाज हमारी थाली तक पहुँचता है, उसके पीछे किसान की मेहनत छुपी होती है। हर मौसम से लड़ता किसान देश की भूख मिटाता है। किसान दिवस हमें रुककर यह सोचने का मौका देता है कि क्या हम उस मेहनत को सच में समझते हैं? 

Dec 23, 2025 - 13:20
Dec 23, 2025 - 13:21
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23 December,  किसान दिवस: सम्मान, संघर्ष और उम्मीद।

शाइना जमील 

खेतों से निकलकर जो अनाज हमारी थाली तक पहुँचता है, उसके पीछे किसान की मेहनत छुपी होती है। हर मौसम से लड़ता किसान देश की भूख मिटाता है। किसान दिवस हमें रुककर यह सोचने का मौका देता है कि क्या हम उस मेहनत को सच में समझते हैं? 

कृषि भारत की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जनगणना 2011 के अनुसार, देश की कुल कार्यबल का 54.6 प्रतिशत कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में कार्यरत है। वर्ष 2022–23 में वर्तमान मूल्यों पर भारत के सकल मूल्य वर्धन (GVA) में कृषि एवं सहायक क्षेत्रों की हिस्सेदारी 18.4 प्रतिशत रही है।
किसान दिवस आखिर किसके जन्मदिन पर मनाया जाता है?

यह दिन देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर मनाया जाता है, जिन्होंने किसानों के हित और अधिकारों के लिए जीवनभर काम किया।

चौधरी चरण सिंह ने किसानों के लिए क्या किया?

उन्होंने किसानों को देश की रीढ़ मानते हुए उनकी समस्याओं को नीति और राजनीति के केंद्र में रखा। खेती को मज़बूत करने, किसानों को सही दाम दिलाने और ग्रामीण विकास पर उन्होंने खास ज़ोर दिया। उनका मानना था कि किसान मजबूत होगा तभी देश आगे बढ़ेगा।
उन्होंने Debt Redemption Bill, 1939 के ज़रिए किसानों को साहूकारों के कर्ज़ से राहत दी। Land Ceiling Act, 1960 के माध्यम से ज़मीन की अधिकतम सीमा तय की गई। उन्होंने MSP (Minimum Support Price) का समर्थन किया और Zamindari Abolition & Land Reforms Laws के ज़रिए भूमिहीन किसानों को लाभ पहुँचाया। ग्रामीण विकास को मज़बूत करने के लिए NABARD की स्थापना में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा और उन्होंने स्थानीय स्वशासन और विकेंद्रीकरण को बढ़ावा दिया।

किसान दिवस सिर्फ़ एक दिन नहीं, बल्कि हमें याद दिलाता है कि हमारे अन्नदाता की मेहनत और संघर्ष को समझना और उसका सम्मान करना हमारी ज़िम्मेदारी है। जब किसान मजबूत और खुशहाल होंगे, तभी देश सच्चाई में समृद्ध होगा।

"मैथिलीशरण गुप्त की प्रसिद्ध कविता ‘किसान’ की ये पंक्तियाँ किसानों की मेहनत, संघर्ष और उम्मीद को जीवंत कर देती हैं:"

"उठो किसान ओ, उठो किसान ओ, बादल घिर आये हैं,
तेरे हरे-भरे सावन के साथी ये आये हैं।

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