ईरान संकट: निर्वासित क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी ने किया घर वापसी का ऐलान, जनता से शहरों पर कब्जा करने की अपील
अदनान आलम
ईरान में राजनीतिक उथल-पुथल और विरोध प्रदर्शनों के बीच निर्वासित क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी ने बड़े स्तर पर शहरों पर कब्जा करने और देश लौटने का ऐलान कर दिया है। उनके इस बयान ने तेहरान की मौजूदा स्थिति को और भी गंभीर और संवेदनशील बना दिया है। यह ऐलान ऐसे वक्त में आया है जब देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन लगातार जारी हैं और आर्थिक तथा राजनीतिक असंतोष चरम पर है।
शहरों पर नियंत्रण के लिए जनता से अपील
पूर्व शाह के बेटे रज़ा पहलवी ने शनिवार को कहा कि अब सिर्फ विरोध प्रदर्शन तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने लोगों से अपने क्षेत्रों और शहरों के प्रमुख केंद्रों पर नियंत्रण स्थापित करने की अपील की है। उनका मानना है कि इससे विरोध का प्रभाव और व्यापक होगा और वर्तमान व्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।
रज़ा पहलवी ने कहा,
“यह संघर्ष सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि हम परिवर्तन चाहते हैं तो हमें शहरों के मुख्य हिस्सों को नियंत्रित करना होगा।”
देश वापसी का ऐलान
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब उनका देश लौटने का समय निकट है और ऐतिहासिक परिस्थितियां उन्हें घर वापस आने के अनुकूल नजर आती हैं। रज़ा पहलवी का कहना है कि उनका लक्ष्य ईरान में मौजूदा राजनीतिक ढांचे में निर्णायक बदलाव लाना है और जनता के साथ मिलकर इसे संभव बनाना है।
बड़ा विरोध आंदोलन जारी
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान में विरोध प्रदर्शन लगभग दो सप्ताह से जारी हैं। प्रदर्शन आर्थिक असंतोष, बढ़ती महंगाई और सरकार की नीतियों के खिलाफ हैं। शिक्षण संस्थानों, व्यापारिक इलाकों और सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन चालू हैं और युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ती जा रही है।
सरकार का कड़ा रुख और दबाव
ईरानी शासन ने विरोध के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने विरोध दलों को चेतावनी दी है और कुछ इलाकों में कानूनी प्रतिबंध तथा सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाओं में अस्थायी ब्लैकआउट जैसे कदम भी उठाए गए हैं, जिससे प्रदर्शनकारियों और आम जनता की आवाज को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।
विरोध पर नागरिकों का प्रतिरोध जारी
विरोध के दौरान बहुत से इलाकों में सुरक्षा बलों के साथ झड़पें भी हुई हैं। प्रदर्शनकारी सरकार की नीतियों और मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ अपने हकों की आवाज बुलंद कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि बदलाव नहीं हुए तो आंदोलन और तेज होगा।
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