कर्ज से परेशान पिता ने दिव्यांग बेटी की हत्या की, परिवार ने की आत्महत्या की कोशिश
हैदराबाद की विजय नगर कॉलोनी से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां आर्थिक तंगी और बढ़ते कर्ज से परेशान एक निजी सिविल ठेकेदार ने अपनी मानसिक रूप से दिव्यांग और बिस्तर पर रहने वाली बेटी की हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी ने अपनी पत्नी और बेटे के साथ आत्महत्या करने की कोशिश की। तीनों ने पहले कीटनाशक और दवाइयां खाईं और बाद में कलाई काटकर जान देने की कोशिश की, लेकिन वे बच गए। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और बेटी का शव बरामद किया। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी के स्वस्थ होने के बाद गिरफ्तारी की बात कही है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।
नवीदुल हसन
कर्ज और व्यापार में नुकसान से टूटे पिता ने दिव्यांग बेटी की हत्या की, पूरे परिवार ने की आत्महत्या की कोशिश
हैदराबाद के कुकटपल्ली इलाके से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां कर्ज और व्यापार में भारी नुकसान से परेशान एक व्यक्ति ने अपनी मानसिक रूप से दिव्यांग और बिस्तर पर रहने वाली बेटी की हत्या कर दी। इसके बाद उसने अपनी पत्नी और बेटे के साथ आत्महत्या करने की कोशिश की। हालांकि, समय पर मदद मिलने से पत्नी और बेटे की जान बच गई।
पुलिस के अनुसार, यह घटना विजय नगर कॉलोनी की है। आरोपी की पहचान मारपुरी सतीश कुमार (54) के रूप में हुई है, जो पेशे से एक निजी सिविल ठेकेदार था। वह आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के मदनपल्ली का रहने वाला था और पिछले कुछ समय से हैदराबाद में रह रहा था।
सतीश की बेटी सृजावली (18) बचपन से ही मानसिक रूप से दिव्यांग थी। वह चलने-फिरने में असमर्थ थी और हमेशा बिस्तर पर ही रहती थी। परिवार का कहना है कि उसकी देखभाल में काफी खर्च और मेहनत लगती थी, जिससे परिवार पहले से चल रहे आर्थिक संकट में और फंसता चला गया।
पुलिस जांच में सामने आया है कि सतीश कुमार को अपने सिविल कॉन्ट्रैक्ट और रियल एस्टेट के काम में भारी नुकसान हुआ था। इसके चलते उस पर काफी कर्ज चढ़ गया था। आर्थिक दबाव और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंता के कारण उसने अपने पूरे परिवार के साथ आत्महत्या करने का फैसला किया।
सोमवार रात सतीश, उसकी पत्नी अमानी (42) और बेटा मिथिल (23) ने पहले कीटनाशक पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की। जब इससे उनकी मौत नहीं हुई, तो उन्होंने कुछ दवाइयां भी खा लीं, जिनमें बुखार की दवाएं और अन्य मेडिसिन शामिल थीं। इसके बावजूद तीनों जीवित रहे।
इसके बाद मंगलवार तड़के करीब 1:30 बजे, सतीश ने अपनी बेटी सृजावली को उसके बिस्तर पर तकिए से दबाकर मार डाला। पुलिस का कहना है कि परिवार ने पहले ही तय कर लिया था कि बेटी को मारने के बाद सभी लोग अपनी जान दे देंगे।
लेकिन जब कई प्रयासों के बाद भी उनकी मौत नहीं हुई, तो मंगलवार शाम करीब 5 बजे तीनों ने रसोई में रखे चाकू से अपनी-अपनी कलाई काट ली। इसी बीच सतीश ने अपने बचपन के दोस्त जी. वेंकट भास्कर रेड्डी को फोन कर घर बुलाया और किसी जरूरी बात के लिए आने को कहा।
जब भास्कर रेड्डी घर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि सतीश, उसकी पत्नी और बेटा गंभीर हालत में थे और उनकी कलाई से खून बह रहा था। उन्होंने तुरंत पड़ोसियों और पुलिस को इसकी जानकारी दी।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। घर के अंदर बेटी सृजावली का शव बिस्तर पर मिला। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं तीनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनकी हालत अब खतरे से बाहर है।
जगदगिरिगुट्टा थाना पुलिस ने इस मामले में सतीश कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि सतीश के पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे गिरफ्तार किया जाएगा।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि फिलहाल कर्ज की सही रकम और अन्य कारणों की जांच की जा रही है। मामले की हर पहलू से जांच जारी है।
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