मेरठ में दलित महिला की हत्या और बेटी के अपहरण का मामला, संसद तक गूंजा आक्रोश
खुशबू खातून
मेरठ (उत्तर प्रदेश)।
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक दलित महिला की निर्मम हत्या और उसकी बेटी के कथित अपहरण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस जघन्य घटना को लेकर पीड़ित परिवार और समाज के लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। मामले के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने न्याय की मांग करते हुए बड़े स्तर पर मार्च निकाला, जिसकी गूंज राजधानी दिल्ली और संसद तक सुनाई दी।
सूत्रों के अनुसार, घटना के बाद से ही स्थानीय लोगों में गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा था। इसी क्रम में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी, फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग करने लगे।
संसद की ओर बढ़ा मार्च, पीछे-पीछे चली यूपी पुलिस
प्रदर्शन के दौरान हालात को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए। संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस और दिल्ली पुलिस की भारी तैनाती की गई। जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई और स्थिति पर नजर रखने के लिए वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि प्रदर्शनकारी संगठित होकर आगे बढ़ रहे हैं, जबकि पुलिस बल उन्हें नियंत्रित करने की कोशिश करता नजर आ रहा है। कुछ स्थानों पर हल्की धक्का-मुक्की की भी खबरें सामने आई हैं, हालांकि किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
क्या है पूरा मामला
बताया जा रहा है कि मेरठ जिले में एक दलित महिला की हत्या कर दी गई, जबकि उसकी बेटी का अपहरण कर लिया गया। इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि प्रदेश और राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल मचा दी है। विपक्षी दलों ने कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर सवाल खड़े किए हैं और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग तेज कर दी है।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासन का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज़ी से की जा रही है। दोषियों को जल्द गिरफ्तार करने के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। साथ ही, इलाके में शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना को लेकर कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। नेताओं ने इसे कानून-व्यवस्था की विफलता बताते हुए पीड़ित परिवार को सुरक्षा और मुआवजा देने की मांग की है। वहीं, सरकार की ओर से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया है।
निष्कर्ष
मेरठ की यह घटना एक बार फिर समाज में महिलाओं की सुरक्षा, दलितों के अधिकार और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई और पीड़ित परिवार को मिलने वाले न्याय पर टिकी हुई है।
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