बाल श्रम कराने वालों पर सख्त कार्रवाई, दोबारा काम पर रखने पर कड़ा कानून
किशोर न्याय कानून के तहत बाल श्रम कराने वालों और इसमें मदद करने वाले अभिभावकों पर कार्रवाई का प्रावधान है। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के अनुसार, बच्चे को बचाने के बाद भी निगरानी जारी रहेगी। यदि कोई दुकानदार या नियोक्ता दोबारा बच्चे से काम कराता है तो उस पर कड़ा मामला दर्ज होगा। हालांकि, अधिकतर मामलों में सबूतों की कमी के कारण आरोपी बरी हो जाते हैं, जिससे कानून का असर कमजोर पड़ रहा है।
नवीदुल हसन
बाल श्रम कराने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई, दोबारा काम पर रखने पर कड़ा कानून
बाल श्रम और बच्चों की तस्करी के मामलों में अब सिर्फ बच्चे को बचा लेना ही काफी नहीं माना जाएगा। किशोर न्याय (जुवेनाइल जस्टिस) कानून के तहत उन अभिभावकों और मालिकों पर भी कार्रवाई की जा सकती है, जो बच्चों से काम कराते हैं या इसमें मदद करते हैं।
एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) के अधिकारियों ने बताया कि किसी बच्चे को बाल श्रम से मुक्त कराने के बाद भी निगरानी की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। कानून व्यवस्था से जुड़ी पुलिस न सिर्फ बचाए गए बच्चे पर नजर रखेगी, बल्कि उस दुकान या प्रतिष्ठान की भी निगरानी करेगी, जहां से बच्चे को छुड़ाया गया था।
अधिकारियों के अनुसार, अगर वही दुकानदार या नियोक्ता दोबारा उस बच्चे से काम कराता हुआ पाया गया, तो उसके खिलाफ मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, इतने बड़े स्तर पर कार्रवाई के बावजूद मामलों में सजा की दर काफी कम है। अधिकारियों ने बताया कि बाल श्रम और तस्करी से जुड़े करीब 80 प्रतिशत मामलों में आरोपी बरी हो जाते हैं। इसकी मुख्य वजहें सबूतों की कमी, गवाहों का बयान बदल जाना और कई बार दुकानदारों द्वारा बच्चे की उम्र की जानकारी से इनकार करना है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि कई मामलों का निपटारा लोक अदालतों में सिर्फ जुर्माना लगाकर कर दिया जाता है, जिससे अपराधियों में कानून का डर पैदा नहीं हो पाता। इसी कारण बाल श्रम पर रोक लगाने की कोशिशों को पूरी तरह सफलता नहीं मिल पा रही है।
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