पाकिस्तान: इमरान ख़ान ने सज़ा के ख़िलाफ़ की अपील, रावलपिंडी में कड़ी सुरक्षा, 1300 से ज़्यादा जवान तैनात।
पाकिस्तान में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने अपनी सज़ा के खिलाफ अपील दायर की है, जिसके बाद रावलपिंडी में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। शहर में 1300 से अधिक सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है और 32 पुलिस चेकपोस्ट बनाए गए हैं। इमरान ख़ान की पार्टी PTI ने विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील की है। वहीं, रावलपिंडी के लियाकत बाग़ में जमात-ए-इस्लामी का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है, जिससे हालात और संवेदनशील हैं।
इस्लामाबाद से रावलपिंडी तक सियासी माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान द्वारा अपनी सज़ा के खिलाफ अदालत में अपील दायर करते ही प्रशासन ने रावलपिंडी में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। संभावित विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, रावलपिंडी में 1300 से अधिक पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है। पुलिस, एलीट फोर्स और अन्य एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। शहर के अलग-अलग इलाकों में जवानों की तैनाती के साथ-साथ 32 पुलिस चेकपोस्ट भी बनाई गई हैं, जिससे पूरा शहर एक सुरक्षा घेरे में नज़र आ रहा है।इस फैसले के बाद इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने विरोध प्रदर्शन का ऐलान कर दिया। पार्टी का आरोप है कि यह फैसला राजनीतिक बदले की कार्रवाई है। PTI के जनरल सेक्रेटरी सलमान अक़रम राजा का कहना है कि इमरान ख़ान ने समर्थकों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की है।इस फैसले के बाद इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने विरोध प्रदर्शन का ऐलान कर दिया। पार्टी का आरोप है कि यह फैसला राजनीतिक बदले की कार्रवाई है। PTI के जनरल सेक्रेटरी सलमान अक़रम राजा का कहना है कि इमरान ख़ान ने समर्थकों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की है।हालात इसलिए भी संवेदनशील हो गए हैं क्योंकि PTI के संभावित विरोध के साथ-साथ रावलपिंडी के लियाकत बाग़ में जमात-ए-इस्लामी का एक बड़ा कार्यक्रम भी प्रस्तावित है, जिससे प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से बचना चाहता है।इमरान ख़ान ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा है कि जनता को अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए एकजुट होकर आवाज़ उठानी चाहिए। वहीं सरकार ने साफ कह दिया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां हर कदम पर सियासी तापमान बढ़ता जा रहा है और सबकी निगाहें आने वाले दिनों पर टिकी हैं।
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