वीर बाल दिवस पर प्रधानमंत्री का संदेश: साहस, त्याग और आत्मविश्वास से बनेगा विकसित भारत
उफ़क साहिल
नई दिल्ली।
वीर बाल दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरु गोबिंद सिंह जी के वीर साहिबजादों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अद्वितीय साहस और बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि साहिबजादों का जीवन केवल इतिहास का अध्याय नहीं, बल्कि आज के भारत और विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का शाश्वत स्रोत है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अल्पायु में भी साहिबजादों ने जिस दृढ़ता और संकल्प के साथ अन्याय का सामना किया, वह देश को नैतिक शक्ति और राष्ट्रप्रेम का मार्ग दिखाता है।
मानसिक गुलामी विकास की सबसे बड़ी बाधा
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की प्रगति के मार्ग में मानसिक गुलामी एक गंभीर चुनौती रही है। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक सोच और पुरानी मानसिकता से बाहर निकलना समय की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, आत्मनिर्भर और विकसित भारत का निर्माण तभी संभव है जब देश अपने सामर्थ्य और स्वदेशी विचारों पर विश्वास करे।
इतिहास के नायकों को मिलेगा उनका हक
प्रधानमंत्री ने कहा कि नया भारत अब अपने इतिहास के नायकों और नायिकाओं के योगदान को भुलाएगा नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन महापुरुषों ने देश के लिए बलिदान दिया, उनके संघर्ष और योगदान को सम्मान और पहचान दी जाएगी।
यह प्रयास युवाओं को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ने और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में सहायक होगा।
युवा पीढ़ी पर सरकार का भरोसा
प्रधानमंत्री मोदी ने Gen-Z और Gen-Alpha पर विश्वास जताते हुए कहा कि भारत का भविष्य युवा शक्ति के हाथों में है। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और कौशल देश को वैश्विक नेतृत्व की दिशा में ले जाएंगे।
सरकार शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के नए अवसरों के माध्यम से युवाओं को सशक्त बना रही है।
डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप से खुल रहे नए रास्ते
प्रधानमंत्री ने डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप और तकनीक की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन पहलों से युवाओं के लिए नए अवसर सृजित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रांति ने छोटे शहरों और गांवों के युवाओं को भी राष्ट्रीय और वैश्विक मंच से जोड़ा है।
विविधता ही भारत की असली ताकत
प्रधानमंत्री ने भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता भारत की पहचान है और यही विकास की आधारशिला है।
उन्होंने सभी भाषाओं और संस्कृतियों के सम्मान पर जोर देते हुए कहा कि समावेशी सोच से ही देश आगे बढ़ेगा।
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