पटना हाईकोर्ट होगा और हाईटेक, 7 नए भवनों और ‘e-ACR Nyaya’ पोर्टल की शुरुआत
पटना हाईकोर्ट को आधुनिक और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। CJI न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने आईटी ब्लॉक, प्रशासनिक भवन, अस्पताल, मल्टीलेवल पार्किंग समेत 7 नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी। उन्होंने कहा कि तकनीक के जरिए न्याय को अधिक पारदर्शी, तेज और आम लोगों के लिए सुलभ बनाया जा सकता है। साथ ही e-ACR Nyaya पोर्टल के लोकार्पण से न्यायिक व्यवस्था में डिजिटल पारदर्शिता और कार्यक्षमता
नवीदुल हसन
पटना हाईकोर्ट होगा और हाईटेक, 7 नए भवनों और ‘e-ACR Nyaya’ पोर्टल की शुरुआत
पटना हाईकोर्ट को जल्द ही और आधुनिक बनाया जाएगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने शनिवार को पटना हाईकोर्ट परिसर में करीब 302.56 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 7 नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इसके साथ ही उन्होंने ‘e-ACR Nyaya’ पोर्टल का भी लोकार्पण किया, जो न्यायिक प्रशासन में एक अहम डिजिटल पहल है।
इन नई परियोजनाओं में आईटी ब्लॉक, प्रशासनिक भवन, अस्पताल, मल्टीलेवल पार्किंग, एडवोकेट जनरल कार्यालय, कर्मचारियों का आवास और एनेक्सी भवन शामिल हैं। इनके बनने से हाईकोर्ट की कार्यक्षमता बढ़ेगी और न्याय देने की प्रक्रिया और तेज होगी।
अपने संबोधन में CJI सूर्य कांत ने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से न्याय प्रणाली ज्यादा पारदर्शी, सुलभ और जनोन्मुखी बनेगी। डिजिटल दस्तावेज और ऑनलाइन सिस्टम से खासकर गरीब, वंचित और दूर-दराज़ के इलाकों में रहने वाले लोगों को न्याय पाने में आसानी होगी। उन्होंने डिजिटल डिवाइड को कम करने पर भी जोर दिया।
इस मौके पर पटना हाईकोर्ट की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) का इलेक्ट्रॉनिक संस्करण e-ACR भी लॉन्च किया गया, जिससे न्यायिक कामकाज में तेजी और पारदर्शिता आएगी।
न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने बिहार के गौरवशाली इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय और पाटलिपुत्र ज्ञान, प्रशासन और लोक कल्याण के बड़े केंद्र रहे हैं। आज पटना हाईकोर्ट भी संवैधानिक मूल्यों और न्याय का मजबूत स्तंभ है।
उन्होंने प्रस्तावित ऑडिटोरियम और अस्पताल भवन की अहमियत बताते हुए कहा कि ऑडिटोरियम न्यायिक संवाद और विचार-विमर्श का केंद्र बनेगा, जबकि अस्पताल न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य का ध्यान रखेगा। उन्होंने कहा कि न्याय का असली मतलब सबसे कमजोर व्यक्ति तक समय पर न्याय पहुंचाना है।
कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति ए. अमानुल्लाह ने कहा कि न्याय में देरी नहीं होनी चाहिए और सीमित संसाधनों के बावजूद पटना हाईकोर्ट ने अच्छा काम किया है। वहीं, न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने अदालतों को “न्याय का मंदिर” बताया और कहा कि मजबूत ढांचे से न्याय तेजी से मिलता है।
स्वागत भाषण में पटना हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि सभी सात परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 320 करोड़ रुपये है। कार्यक्रम में कई वरिष्ठ न्यायाधीश, अधिकारी और अधिवक्ता मौजूद रहे। मुख्य न्यायाधीश का स्वागत शाल, मधुबनी पेंटिंग और पौधा भेंट कर किया गया।
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