न्याय की मांग को लेकर रणक्षेत्र बना खगड़िया समाहरणालय, 4 साल की बच्ची की हत्या से भड़के ग्रामीण
खुशबू खातून
खगड़िया (बिहार):
बिहार के खगड़िया जिले में चार साल की मासूम बच्ची की निर्मम हत्या के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। न्याय की मांग को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण समाहरणालय परिसर पहुंच गए, जहां स्थिति तनावपूर्ण हो गई। गुस्साए लोगों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी एवं कड़ी सजा की मांग की।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, खगड़िया जिले के एक गांव में चार साल की बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई। घटना की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक और गुस्से का माहौल बन गया। परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई बेहद धीमी रही, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती चली गई।
समाहरणालय में प्रदर्शन
घटना से आक्रोशित ग्रामीण न्याय की गुहार लेकर खगड़िया समाहरणालय पहुंचे। देखते ही देखते वहां भारी भीड़ जुट गई और परिसर रणक्षेत्र जैसा बन गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रशासन पर उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों ने कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और मासूम बच्चियों तक सुरक्षित नहीं हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि अपराधियों में कानून का डर खत्म हो चुका है।
पुलिस-प्रशासन का पक्ष
प्रशासन की ओर से अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराने का प्रयास किया और आश्वासन दिया कि मामले की जांच तेजी से की जा रही है। पुलिस का कहना है कि दोषियों की पहचान की जा रही है और जल्द ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी। समाहरणालय परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि हालात नियंत्रण में रहें।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था में मासूमों की जान सुरक्षित नहीं है।
न्याय की मांग
फिलहाल पीड़ित परिवार और ग्रामीण एक ही मांग पर अड़े हैं—
दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और कड़ी से कड़ी सजा।
घटना ने एक बार फिर समाज और प्रशासन के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक मासूम बेटियां हिंसा का शिकार होती रहेंगी।
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